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Sonam Wangchuk Hunger Strike: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक

Sonam Wangchuk Hunger Strike: सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 28 जून से भूख हड़ताल शुरू की। जानें आंदोलन की वजह, प्रमुख मांगें और पूरी जानकारी।

Jassi Parihar
Jassi Parihar
June 29, 20263 min read
Sonam Wangchuk Hunger Strike

Sonam Wangchuk credit by - The Statesman

Sonam Wangchuk Hunger Strike

देश के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में हैं। 28 जून को उन्होंने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। इस बार उनका आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और देश की परीक्षा प्रणाली में कथित अनियमितताओं के खिलाफ है।

वांगचुक का कहना है कि देश के लाखों छात्रों का भविष्य लगातार परीक्षा घोटालों, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ियों की वजह से प्रभावित हो रहा है। ऐसे में केवल जांच से काम नहीं चलेगा, बल्कि जवाबदेही तय होनी चाहिए।

क्यों शुरू की भूख हड़ताल?

सोनम वांगचुक ने पहले ही केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि यदि छात्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे भूख हड़ताल शुरू करेंगे। सरकार की ओर से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने 28 जून से अनिश्चितकालीन उपवास शुरू कर दिया।

उनका कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में विश्वास बहाल करने के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग क्यों?

वांगचुक और प्रदर्शन कर रहे छात्र संगठनों का आरोप है कि पिछले कुछ समय में कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताएं सामने आई हैं। उनका मानना है कि इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेनी चाहिए।

इसी कारण प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक शिक्षा व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है।

जंतर-मंतर पर जुटे छात्र और किसान

सोनम वांगचुक के भूख हड़ताल शुरू करते ही जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में छात्र, युवा, किसान संगठनों के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता पहुंचने लगे। प्रदर्शन की शुरुआत दो मिनट के मौन से की गई।

कई लोगों ने इसे देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन बताया।

आंदोलन में किन मुद्दों को उठाया गया?

प्रदर्शन के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें रखी गईं—

  • केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा।
  • परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता।
  • पेपर लीक और परीक्षा घोटालों पर सख्त कानून।
  • दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई।
  • छात्रों के भविष्य की सुरक्षा।
  • भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाओं में विश्वसनीय व्यवस्था।

सोनम वांगचुक ने क्या कहा?

भूख हड़ताल शुरू करते हुए वांगचुक ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल के खिलाफ आंदोलन नहीं है, बल्कि देश के छात्रों के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।

उन्होंने कहा कि यदि लाखों मेहनती छात्रों का भविष्य लगातार खतरे में रहेगा तो देश की शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा खत्म हो जाएगा।

क्या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई?

आर्टिकल लिखे जाने तक केंद्र सरकार या शिक्षा मंत्रालय की ओर से सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल और इस्तीफे की मांग पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस तेज हो गई है।

आगे क्या होगा?

सोनम वांगचुक ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका अनिश्चितकालीन उपवास जारी रहेगा। आने वाले दिनों में यदि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत होती है तो आंदोलन की दिशा बदल सकती है।

Jassi Parihar
Editorial Board Reporter

Jassi Parihar

Lead AI Architect at CJP Media. Former researcher in cognitive computing and compiler engineering