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सुरेन्द्र गहलोत
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सुरेन्द्र गहलोत
सुरेन्द्र गहलोत• News Author

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Bhavri Devi Hatyakand
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Bhavri Devi Hatyakand: भंवरी देवी बिश्नोई हत्याकांड क्या है? जानें पूरी कहानी और केस का पूरा घटनाक्रम

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सुरेन्द्र गहलोत
सुरेन्द्र गहलोत
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5 MIN READAUG 20, 2026

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Barmer News: 55 दिनों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे आंबाराम मेघवाल, भूमि विवाद मामले में प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
JUL 27, 2026

Barmer News: 55 दिनों से न्याय की लड़ाई लड़ रहे आंबाराम मेघवाल, भूमि विवाद मामले में प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग

Barmer News: बाड़मेर के देदूसर गांव निवासी आंबाराम मेघवाल पिछले 55 दिनों से भूमि विवाद मामले में न्याय की मांग को लेकर धरने पर बैठे हैं। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और अपनी जमीन से जुड़े मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है। Rajasthan Barmer News : बाड़मेर जिला मुख्यालय स्थित कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर देदूसर गांव के निवासी आंबाराम मेघवाल पिछले 55 दिनों से अपनी भूमि विवाद से जुड़े मामले में न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हुए हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपनी जमीन से जुड़े मामले में अब तक न्याय नहीं मिल पाया है, जिसके चलते वे प्रशासन से निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। 55 दिनों से जारी है शांतिपूर्ण धरना आंबाराम मेघवाल शिव विधानसभा क्षेत्र के देदूसर गांव के निवासी हैं। वे पिछले लगभग दो महीनों से जिला कलेक्टर कार्यालय के सामने धरने पर बैठे हुए हैं। उनका आरोप है कि भूमि विवाद से संबंधित मामले में उनकी शिकायत पर अब तक संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई है। न्याय की मांग को लेकर उन्होंने लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध जारी रखा हुआ है। जनप्रतिनिधियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल धरने के दौरान उनसे मुलाकात करने पहुंचे सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें न्याय की लड़ाई में साथ देने का भरोसा दिलाया। इस दौरान यह सवाल भी उठाया गया कि शिव विधानसभा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक इस मामले का सार्वजनिक रूप से संज्ञान क्यों नहीं लिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जनता अपने जनप्रतिनिधियों से केवल विकास कार्यों की ही नहीं, बल्कि संकट की घड़ी में उनके साथ खड़े होने की भी अपेक्षा रखती है। ऐसे में एक नागरिक द्वारा लगातार 55 दिनों तक न्याय की गुहार लगाए जाने के बावजूद राजनीतिक स्तर पर चुप्पी चिंता का विषय बनी हुई है। जिला कलेक्टर के नाम सौंपा गया ज्ञापन आंबाराम मेघवाल के समर्थन में जिला मुख्यालय पर जिला कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया है। ज्ञापन में भूमि विवाद की निष्पक्ष और अंबाराम का कहना है मेरी जमीन पर राजपूत ने जोर जबरदस्ती कब्जा कर दिया है और यह मेरे पूर्वजो की जमीन है उनका कहना है ना तो प्रशासन और ना ही कोई मीडिया इसे बताना चाहती है मैं आज 55 दिन से यहां पर अनशन पर बैठा हूं कोई सुनने वाला नहीं है साथ ही प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। क्या हैं प्रमुख मांगें? आंबाराम मेघवाल और उनके समर्थकों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं— भूमि विवाद मामले की निष्पक्ष जांच करवाई जाए। संबंधित अधिकारियों द्वारा पूरे मामले की पारदर्शी समीक्षा की जाए। पीड़ित को शीघ्र न्याय प्रदान किया जाए। प्रशासन इस मामले में स्पष्ट और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करे। लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध का महत्व भारत के लोकतांत्रिक ढांचे में किसी भी नागरिक को अपनी समस्याओं और मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से प्रशासन के समक्ष रखने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। आंबाराम मेघवाल का धरना भी इसी लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे मामलों में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशील भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, ताकि किसी भी नागरिक को न्याय पाने के लिए लंबे समय तक संघर्ष न करना पड़े।

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15 August Speech in Hindi: स्वतंत्रता दिवस पर शानदार भाषण, ऐसे करें तैयारी
AUG 12, 2026

15 August Speech in Hindi: स्वतंत्रता दिवस पर शानदार भाषण, ऐसे करें तैयारी

15 August Speech in Hindi पढ़ें। स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर छात्रों, शिक्षकों और कार्यक्रमों के लिए सरल, प्रेरणादायक और प्रभावशाली हिंदी भाषण। हर साल 15 अगस्त को देशभर में स्वतंत्रता दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह वही तारीख है जब 1947 में भारत को लंबे संघर्ष के बाद अंग्रेज़ों की गुलामी से मुक्ति मिली थी। इस दिन को सिर्फ एक छुट्टी के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि यह उन सैकड़ों-हज़ारों स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान को याद करने का अवसर होता है, जिन्होंने देश को आज़ाद कराने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। यही वजह है कि 15 अगस्त हर भारतीय के मन में देशभक्ति, एकजुटता और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान जगाने का काम करता है। इस अवसर पर देशभर के स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न शिक्षण संस्थानों में तरह-तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें भाषण प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और देशभक्ति से जुड़े अन्य आयोजन शामिल होते हैं, जिनमें छात्र और शिक्षक बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। अगर आप भी इस साल किसी ऐसे कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले हैं और भाषण की तैयारी करना चाहते हैं, तो आगे दी गई जानकारी आपके काम आ सकती है। 1. स्वतंत्रता दिवस पर भाषण तैयार करें? स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिया जाने वाला भाषण, छात्रों के लिए उन वीर स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने का एक बेहतरीन अवसर होता है, जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। भाषण की शुरुआत करते समय किसी प्रेरक विचार, देशभक्ति से जुड़े नारे या ओजस्वी पंक्ति का सहारा लिया जा सकता है, जिससे श्रोताओं का ध्यान शुरुआत से ही बंध जाए। इसके बाद बात करनी चाहिए 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक अहमियत की यानी वह दिन जब भारत को लंबे संघर्ष के बाद अंग्रेज़ी हुकूमत से मुक्ति मिली। साथ ही स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान का ज़िक्र करते हुए यह भी समझाना ज़रूरी है कि आज़ादी, एकता और लोकतंत्र का हमारे जीवन में क्या महत्व है। भाषण के बीच में देश के प्रति अपनी निष्ठा दर्शाने वाला एक छोटा संदेश या राष्ट्र-सेवा के प्रति अपना संकल्प भी जोड़ा जा सकता है इससे भाषण में व्यक्तिगत भावनात्मक जुड़ाव नज़र आता है। अंत में, स्वतंत्रता संग्राम के महानायकों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए भाषण को ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम’ जैसे प्रेरणादायी उद्घोष के साथ समाप्त करना चाहिए, ताकि श्रोताओं में देशभक्ति की भावना बनी रहे। 2. 15 August Speech in Hindi आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित अध्यापकगण, गरिमामयी अतिथिगण और मेरे सभी प्रिय साथियों आप सभी को सुप्रभात। आज देश जब अपना स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, ऐसे पावन अवसर पर आप सबके सामने अपने विचार रखने का मौका मिलना मेरे लिए वाकई गर्व की बात है। अपनी बात शुरू करने से पहले मैं उन अमर वीरों को याद करना चाहूंगा/चाहूंगी, जिन्होंने देश की मिट्टी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। कहा जाता है कि जो लोग वतन के लिए शहीद होते हैं, उनकी याद हर साल इसी तरह ज़िंदा रहती है यही उनकी बलिदान की सबसे बड़ी निशानी बन जाती है। साल 1947 में जो आज़ादी हमें मिली, वह किसी संयोग का नतीजा नहीं थी, बल्कि हज़ारों-लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की हिम्मत, अटूट संकल्प और त्याग का फल थी। उन्होंने अपनी जवानी, अपना सुख-चैन, यहाँ तक कि अपनी जान तक इस एक सपने के लिए दांव पर लगा दी कि आने वाली पीढ़ियां आज़ाद भारत में सांस ले सकें। इस ऐतिहासिक दिन पर हम महात्मा गांधी, भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आज़ाद और राम प्रसाद बिस्मिल जैसे उन तमाम वीर सपूतों को नमन करते हैं, जिनके संघर्ष और बलिदान के बिना आज हम इस आज़ादी की सांस नहीं ले पाते। 3. स्वतंत्रता दिवस भाषण आदरणीय प्रधानाचार्य महोदय, सम्मानित गुरुजन, उपस्थित अतिथिगण और मेरे सभी प्रिय साथियों, आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। आज हम सभी देश के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर एकत्रित हुए हैं। 15 अगस्त हमारे लिए केवल एक राष्ट्रीय पर्व नहीं, बल्कि उस ऐतिहासिक दिन की याद है जब लंबे संघर्ष के बाद भारत ने 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त की। यह दिन हमें उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने के साथ-साथ अपने देश के प्रति जिम्मेदारियों पर विचार करने का अवसर भी देता है। भारत की आजादी के पीछे वर्षों का संघर्ष और असंख्य लोगों का योगदान रहा है। 1857 के विद्रोह से लेकर असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन तक देशवासियों ने अलग-अलग दौर में स्वतंत्रता की लड़ाई को आगे बढ़ाया। इस संघर्ष में केवल प्रमुख नेता ही नहीं, बल्कि किसान, मजदूर, विद्यार्थी और महिलाओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। महात्मा गांधी ने सत्य और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा। भगत सिंह जैसे युवा क्रांतिकारियों ने अपने साहस और देशप्रेम से युवाओं को प्रेरित किया। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज के माध्यम से स्वतंत्रता के लिए एक अलग दिशा में प्रयास किया। वहीं, सरदार वल्लभभाई पटेल ने देश की विभिन्न रियासतों को एकजुट करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनके अलावा भी असंख्य स्वतंत्रता सेनानी ऐसे रहे, जिनका योगदान देश के इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा। 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ, लेकिन इसके बाद देश के सामने एक नई चुनौती थी—एक मजबूत और विकसित राष्ट्र का निर्माण। स्वतंत्रता केवल अधिकार मिलने का नाम नहीं है, बल्कि इसके साथ नागरिकों की जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं। हमारा संविधान हमें मौलिक अधिकार देता है और साथ ही देश के प्रति अपने कर्तव्यों को निभाने की प्रेरणा भी देता है। इसलिए एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हमें अपने अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों को भी समझना चाहिए। देश के भविष्य को बेहतर बनाने में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। हमें अपने करियर और व्यक्तिगत सफलता के साथ समाज और राष्ट्र के हित के बारे में भी सोचना चाहिए। सोशल मीडिया का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करना, बिना सत्यापन के किसी अफवाह या गलत जानकारी को आगे न बढ़ाना, पर्यावरण की रक्षा करना और संविधान के मूल्यों का सम्मान करना हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में शामिल है। स्वतंत्रता दिवस हमें यह संदेश देता है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। देश का प्रत्येक नागरिक अपने स्तर पर ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करके भारत की प्रगति में योगदान दे सकता है। हमारी छोटी-छोटी सकारात्मक कोशिशें मिलकर देश के भविष्य को मजबूत बनाती हैं। आइए, इस स्वतंत्रता दिवस पर हम संकल्प लें कि अपनी शिक्षा, मेहनत और प्रतिभा का उपयोग देश की प्रगति के लिए करेंगे। हम ऐसा भारत बनाने में अपना योगदान देंगे जो मजबूत, शिक्षित, जिम्मेदार और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार हो। इसी भावना के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। जय हिंद! जय भारत!

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Abhijeet Dipke School Thik Karo Campaign क्या है? जानें अभियान की पूरी जानकारी
AUG 16, 2026

Abhijeet Dipke School Thik Karo Campaign क्या है? जानें अभियान की पूरी जानकारी

Abhijeet Dipke School Thik Karo Campaign क्या है CJP फ्यूचर, स्कूलों की बदहाली के खिलाफ बड़ा अभियान, जानें क्या है मांग Abhijeet Dipke School Thik Karo Campaign क्या है? जानें कॉकरोच जनता पार्टी, (CJP) अभिजीत दीपके ने एक कैंपेन स्टार्ट किया है, स्कूल ठीक करो. आज इंडिया के स्कूलों की हालत बहुत खराब है. और अभिजीत दीपके का कहना है, शहर गांव-गांव जाकर अपने गांव की स्कूल, अपने शहर के स्कूलों को ठीक करो. 15 अगस्त को अभिजीत ने महाराष्ट्र के बुली जिले में अपने गांव संतुक पिंपरी से स्कूल ठीक करो कैंपेन शुरू किया. अपने गांव में स्कूल की साफ-सफाई की कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में उजागर किया. स्कूल में स्वतंत्रता दिवस झंडा फहराने के कार्यक्रम में अभिजीत दीपके ने स्कूलों में गंदे टॉयलेट, जमा हुआ कचरा और पानी की अपर्याप्त सप्लाई दिखाने वाले वीडियो शेयर किए. बताया गया कि कोई बच्चा टॉयलेट को कैसे इस्तेमाल कर सकता है #SchoolThikKaro उन्होंने कहा, आईआईटी, यूनिवर्सिटी, वहाँ पर बच्चे पढ़ने कैसे जाएंगे जब गांव के स्कूलों की हालत ठीक नहीं है. यहाँ पर बेसिक सुविधा भी बच्चों को नहीं दी जा रही है अभिजीत दीपके और उसकी टीम ने जिला परिषद स्कूल का ऑडिट किया. छात्रों से मिलने वाली सुविधा के बारे में बात की, छात्रों की बातों के आधार पर CJP गंदे पानी, गंदे वॉशरूम, टूटी खिड़कियां, मरम्मत स्कूल, साफ-सफाई, खराब खाना जैसी समस्याओं की पहचान की और सरकार से निवेदन किया कि जल्द से जल्द इस बेसिक सुविधा को ठीक किया जाए. दीपके ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, आजादी के 80 साल के बाद भी हमारे सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी है. जब हम सब मिलकर काम करेंगे तभी बदलाव संभव है. आप अपने हर एक शहर में कहीं भी रहते हो, हर एक जिले, हर एक गांव में अपने स्कूल में जाकर स्कूल की छोटी से लेकर बड़ी समस्याओं का समाधान करने की बात करें. स्कूल ठीक करो कैंपेन इसलिए स्टार्ट किया है. स्कूलें ठीक करने के बाद हमें सरकारी हॉस्पिटल के बारे में भी सोचना पड़ेगा. जल्दी हम इसके बारे में भी बात करेंगे। पंचायत ने कार्रवाई का भरोसा दिया अभिजीत दीपके ने स्कूल की कमियों के बारे में सरपंच को बताया और सरपंच ने दीपके से का स्कूल में बेसिक सुविधा का न होना हमें बड़ा दुख होता है, लेकिन हम जल्द से जल्द इन समस्याओं का समाधान करेंगे. उनके मुताबिक इस स्कूलों में एक हफ्ते के अंदर-अंदर इन मुद्दों को हल करने का वादा किया है। IPT के अनुसार, दीपक ने पत्रकारों से कहा, अगर भारत की आजादी के 80 साल बाद भी सरकारी स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी चीजें नहीं हैं, तो देश कैसे तरक्की करेगा। क्या है 'स्कूल ठीक करो' अभियान? Abhijeet Dipke School Thik Karo Campaign. इस कैंपेन का मकसद है, गांव शहर में स्कूलों, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का सोशल ऑडिट करना. और वहाँ ये पता करना कि स्कूलों में बच्चों को जरूरी सुविधा मिल रही है. दीपक ने कहा, स्थानीय स्तर, विभाग और गांव के प्रतिनिधियों को अपने स्कूलों का आकलन और कमियों के लिए बताना और ओर उन्हें ठीक करना। लोगों को प्रोत्साहन किया जाएगा। इस कैंपेन का मतलब गांव में बिजली, साफ पीने का पानी, लड़के और लड़कियों के लिए अलग-अलग चालू लागत वाले शौचालय, बेंच और फूड मिल की क्वालिटी जैसी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाएगा. और गांव के सरपंचों को भी पहले और बाद की तस्वीरों के जरिए सुधारने का रिकॉर्ड करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। सीजेपी सोशल मीडिया के जरिए एक स्टैंड असेसमेंट फॉर्म बांटने की योजना बना रही है, जिससे लोगों की समस्याओं को दर्ज कर सके और उस वेबसाइट पर, उस प्लेटफॉर्म पर वीडियो अपलोड कर सके. PTI के मुताबिक, दीपके ने कहा, हम महाराष्ट्र और पूरे देश के स्कूलों में डाटा इकटा करेंगे, फिर हम उस डाटा को एक साथ करेंगे. और जहां भी भारत के किसी भी कोने में, किसी भी स्कूल, किसी भी गांव में जाने की जरूरत पड़ी, तो हम वहां पर जाएंगे. और उन समस्याओं को दूर करेंगे। डिपके ने राजनीतिक पार्टियों पर निशाना साधा CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि चाहे कोई भी राजनीतिक पार्टी सत्ता में रही हो. सरकार ने सरकारी स्कूल की हालत ठीक करने के लिए कभी नहीं सोचा, और ना ही कोई राजनेता ने सोचा है. अब जनता जाग चुकी है, उन्हें शिक्षा की ज़रूरत है न कि राशन की। उन्होंने कहा, अब लोगों को समझ आ गया है कि उन्हें शिक्षा के बारे में बात करनी ही चाहिए. चाहे किसी भी राजनेता पार्टी की सरकार रही हो, लेकिन स्कूलों में सुधार करना बहुत ज़रूरी है. और ना ही आज तक किसी पार्टी ने, और ना ही किसी नेता ने इस मुद्दे को उठाया हो. हम चाहते हैं कि स्कूलों में बेसिक सुविधाओं की वजह से बच्चों की पढ़ाई में कोई दुविधा न आए। इसलिए सरकार को स्कूलों पर ध्यान देना बहुत ज़रूरी है. राज्यों में सरकारी स्कूल के लिए किसी ने काम नहीं किया, लेकिन अब जरूरी है. हम सवाल पूछकर उनसे काम करवा सकते हैं। दीपके ने शुक्रवार को छत्रपति संभाजीनगर में तिरंगा रैली के दौरान लगाए गए बड़े-बड़े पोस्टर लाखों रुपये के पार्टी के लिए कैंपेन चलाए गए. वो पैसा सरकारी स्कूलों में लगाया जाए, तो आज ये हाल स्कूलों का नहीं होता। महाराष्ट्र के इस रैली में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हुए थे. देवके का तर्क था कि इस पैसे का इस्तेमाल स्कूलों और छात्रों की सुविधाओं के लिए किया जा सकता था. ये अभियान और युवाओं से जुड़े मुद्दों को उठाना और वर्तमान सरकार रैलियों, पोस्टरों, कैंपेनों पर ज्यादा पैसा खर्च कर रही है. वो पैसा सरकारें सरकारी स्कूलों और हॉस्पिटलों में लगाना चाहिए। CJP सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े मुद्दे उठाएगा। अभिजीत दीपके ने कहा, ये कैंपेन सिर्फ शिक्षा के लिए सीमित नहीं रहेगा. CJP सरकारी अस्पतालों की समस्याओं को उजागर करने के लिए ऐसा कैंपेन शुरू करेगा। उन्होंने आरोप लगाया है, सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सिटिंग और बैठने की व्यवस्था नहीं है. उन्हें जमीन पर सोना पड़ता है. और सर्जरी और डायग्नॉस्टिक टेस्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. CJP फाउंडर ने प्राइवेट स्कूलों की फीस को कम करने के लिए मांग की। उन्होंने कहां कुछ परिवार शिक्षा के लिए 1 लाख से 2 लाख तक खर्च कर रहे हैं. प्राइवेट स्कूलों ने इतनी ज़्यादा फीस लेने के कारण भारत की शिक्षा व्यवस्था को खराब कर रखा है. सरकार से निवेदन है कि इन प्राइवेट स्कूलों पर ध्यान दिया जाए और इनकी फीस को कम किया जाए. गरीब बच्चे शिक्षा कैसे पाएंगे, इसलिए प्राइवेट स्कूलों की फीस पर एक सीमा तय होनी चाहिए. CJP तब चर्चा में आया जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट परीक्षा के गड़बड़ियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. और अजीत दीपके का कहना है, CJP कोई पार्टी नहीं है, और न आगे कोई पार्टी बनेगी. ये आम लोगों की कोई आवाज नहीं सुनता, उनके लिए आवाज उठाने का एक मंच है, और ये कभी पार्टी नहीं बनेगी।

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IAS Tukaram Mundhe News: क्यों चर्चा में हैं तुकाराम मुंढे? जानें पूरी कहानी
AUG 14, 2026

IAS Tukaram Mundhe News: क्यों चर्चा में हैं तुकाराम मुंढे? जानें पूरी कहानी

IAS Tukaram Mundhe News एक बार फिर चर्चा में हैं। उनके तबादलों और हालिया बयान से जुड़ी पूरी जानकारी पढ़ें और जानें IAS Tukaram Mundhe News: तुकाराम मुडे महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग्स एडमिनिसन, (FDA) कमीशन पद पर स्थित हैं. जब से इन पद पर तुकाराम मुडे स्थित हुए हैं, वहाँ से फूड माफिया, होटल रेस्टोरेंट, नकली फूड माफिया के शटर डाउन हो गए हैं. इससे पता चलता है कि तुकाराम मुंडे IAS अधिकारी कितने ईमानदार और सच्चे हैं तुकाराम मुडे का 20 साल में 25 बार ट्रांसफर हो चुका है. बीस से पच्चीस बार ट्रांसफर होने के बाद तुकाराम मुडे अपनी ईमानदारी और अपनी ड्यूटी के लिए ईमानदार हैं. आईएएस अधिकारी जब से महाराष्ट्र एफडीए कमीशन पद संभाला है, तब से मुंबई और पूरे राज्य के होटल और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री में खौफ बना हुआ है. देवलीना भट्टाचार्य जी ने सोशल मीडिया पर तुकाराम मुंडे की तारीफ की है. देवलीना भट्टाचार्जी 'साथ निभाना साथिया' टीवी शो से फेमस हुई एक्ट्रेस हैं. वो काफ़ी समय से सोशल मीडिया पर एक्टिव हैं. और वो खुलकर हर मुद्दे पर अपनी राय बिना डरे रखती है. चाहे वो बुराई पर बोलना हो ओर चाहे वो अच्छाई का हो. और उन्होंने महाराष्ट्र के फूड एड कमिश्नर एडमिनिस्ट्रेटर कमिश्नर तुकाराम मुंडे की भी तारीफ की है. देवोलीना भट्टाचार्जी ने की तुकाराम मुंढे की तारीफ देवोलीना में X पर टवीट किया है सोचिए... एक ईमानदार अफ़सर ने पूरे महाराष्ट्र में हलचल मचा दी है और लोग उनके काम की तारीफ़ कर रहे हैं। अगर हर विभाग में उनके जैसे अफ़सर हों, तो अपराधी कानून तोड़ने से पहले सौ बार सोचेंगे। अफ़सोस की बात है कि न्यायपालिका के अनुसार, खाने में तीन कॉकरोच मिलने पर भी लाइसेंस रद्द नहीं किया जा सकता। और हम सब जानते हैं कि मुंधे सर का कितनी बार एक जगह से दूसरी जगह तबादला किया गया है। ईमानदारी की कीमत अक्सर बहुत ज़्यादा चुकानी पड़ती है। उम्मीद है कि उन्हें यहाँ इतना समय मिलेगा कि वे इस सारी गड़बड़ी को हमेशा के लिए ठीक कर सकें ताबड़तोड़ छापे और करोड़ों की जब्ती FDA तुकाराम मुंडे की टीम ने पूरे महाराष्ट्र पर धुआंधार कार्रवाई शुरू कर दी है. जानकारी के अनुसार 1131 से ज्यादा जगहों पर निरीक्षण, यानी प्रतिदिन औसत बीस से अधिक छापे और 49.57 करोड़ रुपये का मिलावटी खाद्य स्टॉक जब्त, 1.6 लाख लीटर मिलावटी दूध पकड़ा गया. महाराष्ट्र में नकली फूड ड्रग्स माफियाओं काफी बढ़ने लगे थे. अब इन छापेमारी से महाराष्ट्र के होटल और रेस्टोरेंट में काफी डर का माहौल है. तुकाराम मुंडे ने 57 रेस्टोरेंट के लाइसेंस सस्पेंड किए हैं. गुटखा, तंबाकू, अवैध कारोबारियों पर कड़ा शिकंजा कसते हुए MCOCA मकोका जैसे सख्त कानून के तहत कार्रवाई की. हाईकोर्ट के कैंटीन पर छापा बॉम्बे हाईकोर्ट के कैंटीन में बिना डरे छापा मारने वाले आईएएस अफसर तुकाराम मुंडे के एक बार फिर धड़ाधड़ एक्शन से सरकार कांप रही होगी. जब से बॉम्बे हाईकोर्ट ने तुकाराम मुंडे को चैलेंज किया है कि आपकी निशाने पर सरकारी ने प्राइवेट क्यों रहते हैं, तब से पहले तुकाराम मुंडे ने हाईकोर्ट के कैंटीन पर छापा मरवाकर लाइसेंस न होने की वजह से एक कैंटीन को सील कर दिया. अब FDA ने IIT बॉम्बे कैंपस में दो हॉस्टल मेस को तुरंत बंद करने का आदेश दिया है. क्योंकि ये मेस बिना वैध फसाई लाइसेंस के चल रहे थे. तुकाराम मुंडे बिना डरे धड़ाधड़ एक्शन ले रहे हैं. उनके एक्शन सरकार कैसे कांपती है, इसका अंदाजा आप एक बात से लगा सकते हैं कि 21 साल के करियर में 25 बार तबादला हो चुका है. लेकिन फिर भी रियल सिंघम किसी से डरते नहीं. तुकाराम मुंढे कौन हैं ? तुकाराम मुंडे का जन्म 3 जून 1975 को महाराष्ट्र के बीड जिले के ताडसोना गांव में जन्म एक किसान परिवार में हुआ। वे अपना समय ज्यादातर जिला परिषद के स्कूल और परिवार के खेत का काम करने में हाथ बंटाते थे. और ये भारत के कई ग्रामीण बच्चों की आम दिनचर्या है. जहां पढ़ाई और मेहनत, मजदूरी, हर एक बच्चे को करना अपना कर्तव्य मानते हैं. तुकाराम मुंडे भी उनमें से एक माने जाते हैं. वो अपनी मेहनत और लगन से आईएएस, UPSC का एग्जाम क्लियर करते हैं. और महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन कमीशन (FDA) के पद पर वर्तमान में स्थित हैं। तुकाराम मुंढे का करियर कैसे आगे बढ़ा? तुकाराम मुंडे ने अपने गांव से 12th करने के बाद अपने गुरु के मार्गदर्शन पर मुंडे ने डिग्री करने के लिए डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट करने के बाद मुंडे ने 2014 में यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा पास की और ऑल ऑफ इंडिया रैंक 20 हासिल की. इसके बाद वे 2015 बेस में आईएएस में शामिल हुए. एक गांव से पढ़ाई करके देश की सबसे प्रभावशाली सेवाओं में से एक में शामिल होने तक का एक बड़ा सफर था।

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Mahindra Scorpio Pickup Truck Review: कीमत, फीचर्स, माइलेज और दमदार Performance की पूरी जानकारी
AUG 18, 2026

Mahindra Scorpio Pickup Truck Review: कीमत, फीचर्स, माइलेज और दमदार Performance की पूरी जानकारी

Mahindra Scorpio Pickup Truck Review पढ़ें और जानें इसकी कीमत, इंजन, माइलेज, फीचर्स, लोडिंग क्षमता और Performance के बारे में पूरी जानकारी। Mahindra Scorpio Pickup Truck Review पढ़े और जाने महिंद्रा ने भारत में एक और नई स्कॉर्पियो लॉन्च कर दी है, जिसका नाम महिंद्रा स्कॉर्पियो पिकअप लाइफस्टाइलर, जो ज्यादातर महिंद्रा बोलेरो से कम्पेयर कर रहे है. शुरुआती कीमत 19.79 लाख रुपये है. भारत में रोजमर्रा के कामों के लिए महिंद्रा बोलेरो को इंडिया में काफी पसंद किया जाता है लेकिन जो लोग लग्जरी और ऑफ रोडिंग के लिए गाड़ी चाहते है उनके लिए महिंद्रा ने स्कॉर्पियो पिकअप लाइफस्टाइलर लॉन्च किया है भारतीय सड़कों पर आज राज करने वाली स्कॉर्पियो लाइफस्टाइल में क्या कुछ खास है, आइए हम विस्तार से देखते हैं. डिज़ाइन और एक्सटीरियर महिंद्रा ने आखिरकार स्कॉर्पियो लाइफस्टार ट्रक को भारतीय बाजार में उतार ही दिया. इसकी डिजाइन की बात करें तो ये गाड़ी आपको महिंद्रा स्कॉर्पियो एन जैसी दिखती है. स्कॉर्पियो एन का डिजाइन, महिंद्रा ट्रक का डिजाइन दोनों सिमिलर जैसा लगता है. इस गाड़ी की स्कॉर्पियो एन से हाइट थोड़ी ज्यादा हो सकती है. बाकी देखने में एकदम प्रीमियम और विदेशी ट्रक की तरह लगती है। इस गाड़ी में साइड प्रोफाइल में डबल टेप कॉन्फिगरेशन, 18 इंच के डुअल टोन, एलॉय व्हील्स, चंकी साइड क्लेडिंग और रूफ रेल्स मिलती हैं। स्कॉर्पियो लाइफस्टाइल के फ्रंट में एल-शेप DRL के साथ ही हाई सेट एलईडी हेडलैंप, क्रोम एक्सेंट वाले सॉडी ग्रिल और बोनेट पर स्कॉर्पियो का वर्डमार्क दिए गए हैं। महिंद्रा पिकअप लाइफस्टाइलर और Toyota Hilux महिंद्रा स्कॉर्पियो पिकअप लाइफस्टाइल का लॉन्च होने से बाकी सभी कंपनियों को काफी बड़ा झटका लगने वाला है. जैसे Toyota Hilux ये गाड़ी महिंद्रा जैसी लगती है, और उनकी प्राइस महिंद्रा से डबल है. टोयोटा इलैक्स की प्राइस 32.45 लाख से 36.99 लाख टॉप मॉडल रहता है. और महिंद्रा स्कॉर्पियो पिकअप लाइफस्टाइल का 19.79 लाख रुपये से शुरुआती कीमत है. Toyota Hilux लग्जरी, लोडिंग और ऑफ-रोडिंग के लिए अच्छी दमदार गाड़ी है. लेकिन अभी महिंद्रा ने अपना पिकअप ट्रक लॉन्च करके मार्केट को हिला दिया है. महिंद्रा पिकअप ट्रक की डिलीवरी अप्रैल 2027 में दी जाएगी। इंजन और परफॉर्मेंस महिंद्रा स्कॉर्पियो लाइफस्टाइल पिकअप में इंजन और परफॉर्मेंस की बात करें तो इसमें स्कॉर्पियो N वाले दमदार पिक्चर इंजन मिलने की उमीद है. इसमें 2.2 लीटर mHAWK डीजल इंजन लगभग 172 HP पावर और 400 Nm टॉर्क का विकल्प मिल सकता है. इस गाड़ी में पेट्रोल और डीजल दोनों का ऑप्शन मिल सकता है. पेट्रोल का 2 लीटर इंजन लगभग 200 HP की पावर और 360 Nm का टॉर्क जेनरेट करता है. और ट्रांसमिशन की बात करें तो 6 स्पीड मैनुअल और 6 स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ फोर व्हील ड्राइव 4WD सिस्टम दिया जाएगा। फीचर्स और इंटीरियर महिंद्र स्कॉर्पियो पिकअप लाइफस्टाइल के इंटीरियर और पिक्चर की बात कर तो स्कॉर्पियो की तुलना में एक नया कैबिनेट लेआउट मिलता है। स्कॉर्पियो पिकअप लाइफस्टाइलर के केबिन में रोटेट ओरिएंटेड बड़ा टच स्क्रीन, इंफॉर्मेंटेट सिस्टम, डिजिटल डिस्प्ले और थ्री स्पोक इंटीरियर दिया गया है. इंटीरियर में, वायरलेस एप्पल कारप्ले, और एंड्रॉइड ऑटो, वायरलेस चार्जर, वेंटिलेटेड फ्रंट सीट्स, डुअल जोन क्लाइमेट कंट्रोल, अलग-अलग वेरिएंट मॉडल के साथ, मल्टिपल एयरबैग्स, फ्रंट और रियल के कैमरे के साथ पार्किंग सेंसर, और ADAS की कुछ ज़रूरी खूबियां भी मिलने की उम्मीद है। स्कॉर्पियो एन में लाइफस्टाइल की तुलना में अधिक बटन दिए गए हैं, और डैशबोर्ड पर लेदर पैनल्स के साथ अधिक प्रीमियम इंटीरियर है, जबकि लाइफस्टाइल को अधिक एक रफ और टफ डैशबोर्ड लेआउट मिलता है। यह गाड़ी किसके लिए सही है अब हम बात करते हैं स्कॉर्पियो पिकअप ट्रक लाइफस्टाइल किसे खरीदनी चाहिए और किनके लिए सही है और किनको नहीं खरीदनी चाहिए. जो लोग रोजमर्रा के काम कर रहे हैं जैसे फार्मिंग का काम, ई-कॉमर्स का काम, या ड्राइविंग का काम. जो इस गाड़ी को कमाई का स्रोत मानते हैं, उनके लिए ये गाड़ी बिल्कुल नहीं है. मेरी बात से आपको बुरा लगेगा, लेकिन मेरी सलाह है कि इन कामों के लिए आपको महिंद्रा Bolero camper लेनी चाहिए, और आपको अभी स्कॉर्पियो ट्रक लाइफस्टाइल का बड़ा इंतजार करना पड़ सकता है क्योंकि इस गाड़ी को आप 2027 में कर ले जा सकते हो, लेकिन महिंद्रा बोलरो डीलर के पास उपलब्ध है, और आप कभी भी ले जा सकते हो. प्राइस में भी काफी डिफरेंस है. अगर जैसे लग्जरी लाइफ और ऑफ-रोडिंग जैसे कामों के लिए चाहिए, वो इस कार को ले सकता है।

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Mirabai Chanu Wins Gold Medal: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला गोल्ड मेडल
JUL 27, 2026

Mirabai Chanu Wins Gold Medal: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को दिलाया पहला गोल्ड मेडल

Mirabai Chanu Wins Gold Medal: भारतीय वेटलिफ्टर मीराबाई चानू ने महिलाओं के 190 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया। जानिए उनकी ऐतिहासिक जीत और शानदार प्रदर्शन की पूरी कहानी। Mirabai Chanu Wins Gold Medal गुवाहाटी: भारत की स्टार वेटलिफ्टर और ओलंपिक पदक विजेता साइखोम मीराबाई चानू ने 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 48 किलोग्राम भारवर्ग स्पर्धा में देश के लिए पहला स्वर्ण पदक जीत लिया। उनकी इस उपलब्धि के साथ भारत ने प्रतियोगिता में दमदार आगाज़ किया। राज्य: मणिपुर गाँव: नोंग्पोक काचिंग (इम्फाल के पास) खेल: भारोत्तोलन (वेटलिफ्टिंग) मणिपुर की 31 वर्षीय मीराबाई ने कुल 190 किलोग्राम वजन उठाकर लगातार तीसरी बार कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया कि इस वर्ग में उनका दबदबा बरकरार है। इसी दिन मणिपुर के ही चनांबम ऋषिकंता सिंह ने पुरुषों की 60 किलोग्राम स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया, जिससे भारत के कुल पदकों की संख्या तीन तक पहुंच गई। वेटलिफ्टिंग में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन लगातार जारी है। शुरुआती मुकाबलों में ही टीम भारत को दो अहम पदक मिल चुके हैं और आगे भी पदकों की उम्मीद बनी हुई है। अब सभी की नजरें पुरुषों की 65 किलोग्राम कैटेगरी में उतरने वाले भारतीय खिलाड़ी एम राजा पर रहेंगी। इस जीत के साथ मीराबाई चानू के नाम अब कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल चार पदक दर्ज हो चुके हैं। इससे पहले भी वह ग्लासगो और बर्मिंघम संस्करण में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ा चुकी हैं। स्नैच राउंड की शुरुआत मीराबाई के लिए आसान नहीं रही। उन्होंने पहले प्रयास में 82 किलोग्राम वजन उठाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी करते हुए अगले प्रयासों में बेहतर प्रदर्शन किया और तीसरे प्रयास में 85 किलोग्राम वजन सफलतापूर्वक उठाकर कॉमनवेल्थ गेम्स का नया रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। क्लीन एंड जर्क राउंड में भी उन्हें शुरुआती चुनौती का सामना करना पड़ा। पहले प्रयास में 105 किलोग्राम वजन उठाने में असफल रहने के बाद उन्होंने दूसरे प्रयास में यह वजन सफलतापूर्वक उठाया। इसी प्रदर्शन ने उन्हें स्वर्ण पदक सुनिश्चित कर दिया। प्रतियोगिता में मजबूत बढ़त मिलने के बाद उन्होंने अपना तीसरा और अंतिम प्रयास नहीं करने का फैसला किया। महिलाओं की 48 किलोग्राम स्पर्धा में नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने रजत पदक जीता, जबकि मलेशिया की आइरीन जेन हेनरी को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। मीराबाई चानू की यह उपलब्धि भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए एक और बड़ी सफलता मानी जा रही है। लगातार बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर उन्होंने खुद को देश की सबसे सफल वेटलिफ्टर्स में शामिल रखा है और कॉमनवेल्थ गेम्स में अपनी मजबूत पकड़ को एक बार फिर साबित किया है। ओलंपिक में बड़ी कामयाबी 2016 के रियो ओलंपिक में साइखोम मीराबाई चानू का प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और शानदार अंदाज़ में वापसी की। उनके करियर का सबसे यादगार क्षण टोक्यो ओलंपिक में आया, जहां उन्होंने महिलाओं की 49 किलोग्राम वेटलिफ्टिंग स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि के साथ वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली भारत की दूसरी महिला वेटलिफ्टर बनीं। इस सफलता ने उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई और उनकी लोकप्रियता के साथ-साथ ब्रांड वैल्यू में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। ओलंपिक के बाद भी मीराबाई ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार शानदार प्रदर्शन किया। हाल ही में 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने भारत के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतकर एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। इस जीत ने विश्व वेटलिफ्टिंग में उनकी मजबूत मौजूदगी को और पुख्ता किया तथा उन्हें भारत की सबसे सफल और भरोसेमंद वेटलिफ्टर्स में शामिल कर दिया। Mirabai Chanu ट्रक ड्राइवरको कभी नहीं भूले। दुनिया भर में अपनी उपलब्धियों से पहचान बनाने वाली साइखोम मीराबाई चानू ने सफलता मिलने के बाद भी अपने संघर्ष के दिनों को कभी नहीं भुलाया। उन्होंने उन लोगों के प्रति आभार जताया जिन्होंने उनके शुरुआती सफर में उनका साथ दिया और मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया। टोक्यो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने के बाद मीराबाई ने उन करीब 150 ट्रक ड्राइवरों को खोजा, जिन्होंने प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बिना किसी शुल्क के लिफ्ट देकर मदद की थी। उनके सम्मान में उन्होंने पारंपरिक मणिपुरी भोज का आयोजन किया, उपहार भेंट किए और अपने खेल जीवन में उनके योगदान के लिए धन्यवाद व्यक्त किया। उनके इस भावनात्मक कदम की देशभर में सराहना हुई और यह संदेश गया कि किसी खिलाड़ी की सफलता में समाज और समुदाय का सहयोग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ओलंपिक पदक जीतने के बाद मीराबाई चानू के करियर ने नई ऊंचाइयों को छुआ। उन्हें पुरस्कार राशि, सरकारी सम्मान और राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक पहचान मिली। इसके साथ ही वह भारत की सबसे लोकप्रिय ब्रांड एंबेसडरों में शामिल हो गईं और कई प्रतिष्ठित कंपनियों ने उन्हें अपने प्रचार अभियानों का हिस्सा बनाया। मीराबाई एडिडास और एमवे जैसे प्रमुख ब्रांड्स के साथ जुड़ीं। उन्होंने फिटनेस, पोषण, स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण से जुड़े कई जागरूकता अभियानों में भी सक्रिय भागीदारी निभाई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बाद उनकी ब्रांड वैल्यू में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और उनके कई कमर्शियल एंडोर्समेंट सौदों की कीमत ₹1 करोड़ प्रति डील से अधिक बताई गई। उनकी लोकप्रियता केवल खेल उपलब्धियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि उनकी मेहनत, सादगी और प्रेरणादायक जीवन यात्रा ने भी लोगों का भरोसा और सम्मान हासिल किया। मीराबाई चानू की बढ़ती ब्रांड साझेदारियां इस बात का भी संकेत हैं कि भारत में ओलंपिक खिलाड़ियों को अब पहले की तुलना में अधिक स्पॉन्सरशिप और व्यावसायिक अवसर मिल रहे हैं। यह बदलाव देश के खेल इकोसिस्टम में उभरते नए दौर को दर्शाता है, जहां विभिन्न खेलों के सफल एथलीट भी बड़े ब्रांड्स की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। राष्ट्रीय पहचान और प्रेरणादायक सफर खेलों में शानदार उपलब्धियों और विभिन्न ब्रांडों के साथ जुड़ाव के अलावा, साइखोम मीराबाई चानू को देश के सर्वोच्च खेल सम्मान मेजर ध्यानचंद खेल रत्न और प्रतिष्ठित पद्म श्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। इन सम्मानों ने भारतीय खेल जगत में उनकी विशेष पहचान को और मजबूत बनाया है। आज मीराबाई चानू भारत की सबसे चर्चित और प्रेरणादायक खिलाड़ियों में गिनी जाती हैं। हालांकि, सफलता के इस मुकाम तक पहुंचने के बावजूद उनका जुड़ाव अपने मणिपुर के ग्रामीण परिवेश और उन लोगों से बना हुआ है, जिन्होंने शुरुआती संघर्ष के दिनों में उनका हर कदम पर साथ दिया। मणिपुर की कठिन परिस्थितियों में सफर तय करने से लेकर ओलंपिक मंच पर भारत का गौरव बढ़ाने और बड़े एंडोर्समेंट समझौतों तक पहुंचने की उनकी यात्रा मेहनत, आत्मविश्वास और सामुदायिक सहयोग की मिसाल है। मीराबाई चानू की कहानी यह भी दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले भारतीय खिलाड़ियों के लिए आज अवसर लगातार बढ़ रहे हैं और उनकी सफलता नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को प्रेरित कर रही है।

Entertainment Section

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Vijay Thalapathy New Movie Jana Nayagan Review in Hindi : विजय की आखिरी फिल्म ने मचाया धमाल
JUL 23, 2026

Vijay Thalapathy New Movie Jana Nayagan Review in Hindi : विजय की आखिरी फिल्म ने मचाया धमाल

Vijay Thalapathy New Movie Jana Nayagan Review in Hindi : विजय की आखिरी फिल्म 'जन नायकन' रिलीज होने पर ही धमाल मचा देती है। जानिए फिल्म का रिव्यू, बॉक्स ऑफिस और दर्शकों की प्रतिक्रिया। Vijay Thalapathy New Movie Jana Nayagan Review in Hindi में रिलीज की गई साउथ सुपरस्टार विजय Jana Nayagan सिनेमाघरों में 10:00 बजे तक 5 करोड रुपए कमा चुकी है। यह फिल्म 23 जुलाई 2026 को सिनेमाघर में रिलीज हो गई है इस फिल्म को लेकर फैंस के बीच लंबे समय से जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा था। खास बात यह है कि इसे विजय के फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने राजनीति में कदम रखने के बाद अपने सिनेमाई सफर को विराम देने का फैसला किया है। फिल्म की रिलीज कई कारणों से चर्चा में रही। पहले इसे तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले जनवरी में रिलीज किया जाना था, लेकिन कुछ वजहों से इसकी रिलीज टाल दी गई। अब यह फिल्म ऐसे समय में रिलीज हुई है जब विजय राजनीति में सक्रिय हो चुके हैं और राज्य की राजनीति में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। CBFC से मंजूरी के बाद रिलीज हुई फिल्म निर्देशक एच विनोथ के निर्देशन में बनी यह एक्शन-थ्रिलर फिल्म रिलीज से पहले केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की प्रक्रिया को लेकर भी सुर्खियों में रही। कई दौर की चर्चाओं के बाद फिल्म को आखिरकार 'A' सर्टिफिकेट मिला। हालांकि, इसका फैंस की दीवानगी पर कोई असर नहीं पड़ा। ट्रेड एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि फिल्म पहले दिन 100 करोड़ रुपये तक का कलेक्शन कर सकती है। 2,500 से ज्यादा स्क्रीन पर हुई रिलीज ऑनलाइन लीक होने और रिलीज में देरी जैसी चुनौतियों के बावजूद फिल्म को लेकर दर्शकों का उत्साह कम नहीं हुआ। Jana Nayagan को भारतभर में करीब 2,500 से ज्यादा स्क्रीन पर रिलीज किया गया है। कई राज्यों में सुबह 6 बजे से ही फिल्म के शो शुरू हो गए, जबकि तमिलनाडु में सुबह 9 बजे से फिल्म की स्क्रीनिंग शुरू हुई। फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल, ममिता बैजू, प्रकाश राज, गौतम वासुदेव मेनन और नारायण जैसे कलाकार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। Jana Nayagan Day 1 Box Office Collection ट्रेड वेबसाइट Sacnilk के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के पहले दिन सुबह 10:30 बजे तक भारतीय बॉक्स ऑफिस पर लगभग 5.12 करोड़ रुपये का नेट कलेक्शन कर लिया था। उस समय तक फिल्म देशभर में करीब 3,068 शोज में दिखाई जा रही थी। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, फिल्म ने लगभग 6.04 करोड़ रुपये का ग्रॉस कलेक्शन किया है। हालांकि, दिनभर के शो खत्म होने के बाद इसकी कमाई में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। सोशल मीडिया पर मिल रहे शानदार रिव्यू फिल्म रिलीज होने के साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर दर्शकों के रिएक्शन सामने आने लगे हैं। कई यूजर्स ने इसे विजय के लिए एक शानदार और भावुक विदाई बताया है। एक यूजर ने लिखा कि फिल्म का इमोशनल कनेक्शन इसकी सबसे बड़ी ताकत है। विजय और ममिता बैजू के बीच के सीन दर्शकों को काफी पसंद आ रहे हैं। वहीं, अनिरुद्ध रविचंदर का बैकग्राउंड म्यूजिक और गाने फिल्म को और भी दमदार बनाते हैं। इंटरवल सीन को कई लोगों ने फिल्म का सबसे बेहतरीन हिस्सा बताया है। फिल्म में बुस्सी आनंद का कैमियो भी दर्शकों के लिए सरप्राइज साबित हुआ है। वहीं, क्लाइमैक्स और पोस्ट-क्रेडिट सीन को लेकर भी काफी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। कमर्शियल एंटरटेनर के रूप में पसंद आ रही फिल्म कुछ समीक्षकों ने फिल्म को एक शानदार मास एंटरटेनर बताया है। उनके मुताबिक, फिल्म के दूसरे हिस्से में राजनीतिक और एक्शन तत्वों का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलता है। विजय की स्क्रीन प्रेजेंस पूरी फिल्म में सबसे ज्यादा प्रभावशाली नजर आती है। विजय और ममिता बैजू के इमोशनल सीन, "Good Touch, Bad Touch" वाला सीक्वेंस और अनिरुद्ध का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की खासियत माने जा रहे हैं। फ्लैशबैक सीन, जंगल एंट्री और क्लाइमैक्स को भी दर्शकों ने काफी पसंद किया है। हालांकि, कुछ समीक्षकों का मानना है कि फिल्म के कुछ हिस्से थोड़े पुराने अंदाज के लगते हैं और बॉबी देओल का ट्रैक अपेक्षाकृत लंबा महसूस होता है। इसके बावजूद इसे एक बेहतरीन कमर्शियल एंटरटेनर बताया जा रहा है। कई समीक्षकों ने फिल्म को 3.5/5 की रेटिंग दी है। बॉबी देओल के किरदार को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया फिल्म ट्रेड एनालिस्ट्स ने फिल्म के पहले हाफ की समीक्षा करते हुए विजय की एंट्री, टाइटल कार्ड और इंटरवल ब्लॉक की खूब तारीफ की है। वहीं, बॉबी देओल के किरदार को कुछ दर्शकों ने उम्मीद के मुताबिक प्रभावशाली नहीं बताया है। पहले हाफ की धीमी रफ्तार पर उठे सवाल कुछ शुरुआती रिव्यू में फिल्म के पहले हाफ को थोड़ा धीमा बताया गया है। दर्शकों का कहना है कि इंटरवल से पहले फिल्म की गति थोड़ी धीमी महसूस होती है। हालांकि, विजय की परफॉर्मेंस, ममिता बैजू की मौजूदगी और अनिरुद्ध के म्यूजिक ने दर्शकों को बांधे रखा है। फिल्म में कई राजनीतिक संदर्भ भी देखने को मिलते हैं, जो विजय के राजनीतिक सफर से जुड़ाव का एहसास कराते हैं। कई दर्शकों को उम्मीद है कि फिल्म का दूसरा भाग उन्हें पूरी तरह संतुष्ट करेगा। थिएटरों में जश्न का माहौल फिल्म की रिलीज के साथ ही देशभर के सिनेमाघरों में विजय के फैंस का उत्साह देखने लायक रहा। बेंगलुरु के अरुणा थिएटर से सामने आए वीडियो में दर्शक फिल्म की शुरुआत पर जमकर जश्न मनाते दिखाई दिए। थिएटर के अंदर फैंस ने डांस किया, जोरदार नारे लगाए और पटाखे भी जलाए। विजय की आखिरी फिल्म को लेकर उनके प्रशंसकों के बीच किसी त्योहार जैसा माहौल देखने को मिला।

Public Affairs Section

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Bhavri Devi Hatyakand: भंवरी देवी बिश्नोई हत्याकांड क्या है? जानें पूरी कहानी और केस का पूरा घटनाक्रम
AUG 20, 2026

Bhavri Devi Hatyakand: भंवरी देवी बिश्नोई हत्याकांड क्या है? जानें पूरी कहानी और केस का पूरा घटनाक्रम

Bhavri Devi Hatyakand की पूरी कहानी जानें। भंवरी देवी मर्डर केस में क्या हुआ, जांच कैसे आगे बढ़ी, केस से जुड़ी पूरी जानकारी यहां पढ़ें। Bhavri Devi Hatyakand - राजस्थान के फलोदी जिले में लोहावट के संभेश्वर नगर में 27 जुलाई को भंवरी देवी बिश्नोई की किसी ने हत्या कर दी। भंवरी देवी अपने घर में बच्चों के साथ थी, वहीं पर हमलावर आकर उनकी हत्या कर देते हैं। हमले के मामले में आज ग्यारह दिन बीत चुके हैं लेकिन पुलिस के हाथ अभी भी खाली हैं। इस हमलावर के विरोध में पूर्व विधायक किशनराम बिश्नोई के नेतृत्व में 41 लोग अनशन पर बैठे हुए हैं। प्रशासन द्वारा प्रशासन ने 30 जुलाई को पांच दिन में आरोपियों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया था लेकिन अभी तक आरोपी पकड़े नहीं गए हैं। इसी वजह से लोगों में गुस्सा और आंदोलन के लिए लोग सड़कों पर उतर गए हैं। कौन है भंवरी देवी बिश्नोई भवरी देवी राजस्थान के फलोदी जिले के लोहावट के जंबेश्वर नगर की रहने वाली हैं। भंवरी देवी की कास्ट बिश्नोई और उनके दो बच्चे हैं घटनाक्रम के टाइम हसबैंड काम करने के लिए विदेश गए थे। Bhavri Devi Hatyakand घटनाक्रम पूरी घटना - राजस्थान के जोधपुर के पास फलौदी जिले में लोहावट के क्षेत्र जंबेश्वर नगर की सश्रित Bhavri Devi Bishnoi Hatyakand। भंवरी देवी 31 जुलाई को अपने घर पर अपने दो बेटियों के साथ सो रही थी, तभी कुछ हमलावर आए और हमलावरों ने पहले घर के अंदर जाने की कोशिश की, फिर देखा कि भंवरी देवी और उनके बच्चे बाहर आंगन में सो रहे थे तो हमलावर ने भंवरी देवी को खंजर से हत्या कर दी और उनकी दो बेटियां हैं, बड़ी बेटी 15 साल की और छोटी बेटी 10 साल की है, तो बेटियों ने चिल्लाना शुरू किया और बेटियों के ऊपर भी हमलावर ने हमला किया, 15 साल की बेटी पर गले पर कुछ क्रॉस आई, जिनमें ज्यादा चोट नहीं लगी और उधर दोनों बेटियां हमलावर से बचकर भाग निकलीं, अपनी जान बचाकर लेकिन भंवरी देवी भंवरी देवी को खंजर से लहू लोहान कर दिया। 2 सौ मीटर पर बच्चों के ताऊजी का घर है, वहाँ पर बच्चियां गई और चिल्लाने लगी कि हम पर हमलावर मारने आए। तो उनके ताऊजी वगैरह सभी भागकर वहाँ पर आए, तब तक वो हमलावर भागकर भाग चुका था इस घटनाक्रम में भंवरी देवी को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उनकी जान नहीं बचा सके। भंवरी देवी के हसबैंड किसान व खेती का काम करते हैं, लेकिन दुबई कमाने के लिए गए हुए थे। उन्हें इस घटना का पता चला तो तुरंत वो अपने घर आ गए। प्रशासन पुलिस का कहना है पुलिस व गांव वालों ने पैर को टका और उनके परिवार वालों को आश्वासन दिया कि पाँच दिन के अंदर हमलावर को हम पकड़ लेंगे, लेकिन अभी तक पुलिस वालों के हाथ हमलावर नहीं पकड़े गए हैं। इसी वजह से लोगों में जनाक्रोश और लोग आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं। 19 अगस्त मंगलवार को कलेक्टर घेराव के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतर गए और न्याय की मांग करने लगे। न्याय की मांग में लाखों लोग कलेक्टर घेराव भंवरी देवी बिश्नोई हत्याकांड पुलिस की नाकामयाबी। प्रशासन ने 31 जुलाई को लोगों को आश्वासन दिया था कि 5 दिन के अंदर भंवरी देवी को न्याय दिलाया जाएगा, लेकिन पुलिस को हमलावर नहीं मिले। तो लोगों ने भंवरी देवी न्याय के लिए कलेक्टर घेराव के लिए लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। पुलिस के रोकने व बैरिकेड लगाने पर लोगों ने बैरिकेड उखाड़ फेंके और पत्थरबाजी करने लगे। तो पूर्व विधायक किसना राम बिश्नोई ने आगे बढ़कर लाखों लोगों का मोर्चा संभाला। पूर्व विधायक ने संभाला मोर्चा पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी झड़प होने की बात सामने आई, जिसके चलते कुछ समय के लिए स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इसी दौरान कुछ युवकों ने पुलिस की ओर पथराव करने का प्रयास किया। हालात बिगड़ते देख पूर्व विधायक किसनाराम विश्नोई ने आगे बढ़कर मोर्चा संभाला। उन्होंने लोगों को शांत कराया और समझाइश देकर स्थिति को हिंसक रूप लेने से रोकने में मदद की।

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