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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : सारे बैरिकेड्स हटाए जाएं और सभी मेट्रो स्टेशन जल्द से जल्द खोले जाएं।

दिल्ली में CJP प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: बैरिकेड्स हटाने, मेट्रो स्टेशन खोलने और ट्रेन व इंटरनेट सेवाएं बहाल करने की मांग

Ashutosh Sharma
Ashutosh Sharmaप्रधान संपादक एवं राजनीतिक विश्लेषक
October 11, 2026•3 min read•Beat: राजनीति
CJP Protest Jantar Mantar 10 October 2026

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला : Cockroach Janta Party के संस्थापक अभिजीत दिप्के ने 2 अक्टूबर को ऐलान किया था कि 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। हालांकि, 10 अक्टूबर की सुबह उन्हें और उनके साथियों को दिल्ली एयरपोर्ट पर ही हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया।

इसके अलावा, कई विपक्षी नेताओं को उनके घरों और गाड़ियों से हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। इसी बीच, प्रसिद्ध यूट्यूबर ध्रुव राठी को भी गुरुग्राम स्थित उनके घर से पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने का दावा किया गया। प्रदर्शन के दौरान 5,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात भी कही गई। दिल्ली में कई जगह बैरिकेड्स लगाए गए और यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई।

CJP protest 10 October

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: दिल्ली में CJP प्रदर्शन और मेट्रो सेवाओं पर सुनवाई


अब इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। 10 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका पर अदालत ने विशेष सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान बैरिकेडिंग, मेट्रो सेवाओं पर प्रतिबंध और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित किए जाने जैसे मुद्दे उठाए गए। याचिका में मांग की गई कि आम जनता को हो रही परेशानियों को देखते हुए आवश्यक सेवाएं जल्द से जल्द बहाल की जाएं और अनावश्यक प्रतिबंध हटाए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर जोर देते हुए कहा कि नागरिकों को अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है। हालांकि, प्रदर्शन कानून के दायरे में होना चाहिए और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जाने वाले कदम आवश्यक और उचित होने चाहिए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली मेट्रो रेल निगम सहित संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किए। हिरासत में लिए गए लोगों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर उठाए गए सवालों पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा गया।

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Supreme Court



कपिल सिब्बल ने क्या कहा?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने हिरासत की कार्रवाई और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती दी। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोगों को ट्रेनों से उतारकर हिरासत में लिया गया और इंटरनेट सेवाओं को निलंबित करने से भी आम नागरिक प्रभावित हुए। इस दौरान उन्होंने अनुराधा भसीन मामले में सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला भी दिया।

कुल मिलाकर, इस मामले में प्रदर्शनकारियों के अधिकारों, पुलिस की कार्रवाई और आम जनता को होने वाली असुविधा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए हैं। अब संबंधित अधिकारियों के जवाब और अदालत की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

Ashutosh Sharma
प्रधान संपादक एवं राजनीतिक विश्लेषक • राजनीति

Ashutosh Sharma

आशुतोष शर्मा सीजेपी मीडिया के प्रधान संपादक एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, चुनाव, सार्वजनिक नीतियों, शासन and जनहित के विषयों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। उनकी पत्रकारिता तथ्य, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर आधारित है।