Drishyam 3 Review In Hindi: कैसी है अजय देवगन की फिल्म? जानें कहानी
Drishyam 3 Review In Hindi में आपको बताया जाएगा अजय देवगन की दृश्यम 3 कैसी है? जानें फिल्म की कहानी


Drishyam 3 Review In Hindi में आपको बताया जाएगा Drishyam 2, से Drishyam 3 में अलग क्या देखने को मिलेगा। आप लोगों को बता दें कि Drishyam 3 मूवी सिनेमा घरों में लॉन्च हो चुकी है। 2 अक्टूबर, यानी गांधी जयंती के अवसर पर सिनेमाघरों में अभिषेक पाठक के डायरेक्शन में इस फिल्म को रिलीज किया गया है। इस फिल्म में एक बार फिर विजय सलगांवकर (Ajay Devgn) के रोल में वापस दिखने वाले हैं। Drishyam 3 मूवी में अजय देवगन के अलावा तब्बू, प्रकाश राज, रजत कपूर, सुर्या शरण, स्वीता दत्ता, मृणाल जाधव और जयदीप अलावत ये सभी इस मूवी में अहम किरदार निभा रहे हैं। इस मूवी में इस बार विजय सलगांवकर के खिलाफ पुलिस के पास काफी सबूत होने के बावजूद विजय सालगार कैसे अपने परिवार को बचाता है, आइए देखते हैं।

दृश्यम 3 कैसी है?
Drishyam 2 के बाद अब दृश्यम 3 फिल्म को 2 अक्टूबर को अजय देवगन की यह फिल्म थिएटर में रिलीज की गई है अजय देवगन के फैंस ने इस फिल्म को काफी पसंद किया और एक फैन ने अजय देवगन की एक्टिंग की तारीफ करते हुए कहा है कि यह फिल्म ब्लॉकबस्टर होगी काफी दर्शकों का कहना है कि फिल्म में सस्पेंस बरकरार रखा है फिल्म दृश्यम 2 से भी अच्छी है और फिल्म दृश्यम 2 से फिल्म दृश्यम 3 का एक्शन और अजय सर की एक्टिंग बहुत ही जबरदस्त है।
कुछ फैंस ने इस Drishyam 3 फिल्म को 5 रेटिंग देते हुए कहा है कि ये फिल्म द कन्क्लूजन बॉक्स ऑफिस पर सुनामी लाने वाली है। दर्शकों को क्रिटिक्स का भी बेहतर रिस्पॉन्स मिला है, जिसमें क्रिटिक्स का कहना भी है कि फिल्म उम्मीदों पर खरी उतरी है, इसमें कोई शक नहीं है फिल्म 2026 की सबसे बेहतर फिल्म होने वाली है।
Drishyam 3 देखनी चाहिए नहीं
दृश्यम 3 की कहानी उतनी ही है, मगर हर बार की तरह उसमें ढेर सारे टर्न्स ऐंड ट्विस्ट आते हैं, और वो भी बिल्कुल लास्ट मोया मेंट पर। किसी थ्रिलर फिल्म की खूबी ये होती है कि दर्शकों के दिमागों में चैलेंज करती है, उन्हें कितना सरप्राइज करती है और कितना इंगेज करती है। दृश्यम 3 इन सभी मोर्चों पर बढ़िया नंबर स्कोर करती है। कई बार ये कन्वेंशनल रास्ते या ईज़ी वे और चुनती है, मगर ये मेकर्स का लुकाव. फिल्म वर्ल्ड का नायक दोनों ही खुद को बहुत स्मार्ट समझते हैं। नायक साहब हैं भी स्मार्ट, मगर फिल्म उतनी नहीं। ये एक अच्छी थ्रिलर फिल्म है, एंटरटेनिंग भी है। विजय और उसकी फैमिली का ऑडियंस से जो कनेक्शन बना इतने सालों में, वो फिल्म को बहुत ज़्यादा फायदा पहुँचाता है।

प्लस फिल्म का विषय इतना सार्वभौमिक यानी यूनिवर्सल है कि सब लोग नायक की साइड पर होते हैं। वो जानते हैं कि वो गलत है। वो गलती भले ही सेल्फ डिफेंस पर हुई हो या वाजिब बजह हो, मगर क्राइम तो क्राइम है। इस फिल्म और फ्रेंचाइज़ का सारा भार इस ट्रीट पर टिका था कि इस फिल्म में विद्युत हलगांवकर और उसकी फैमिली के साथ क्या होता है। फिल्म उसको क्लोजर देने का काम करती है, मगर ये क्लोजर जो है, एक पक्ष को ही मिलता है, जो कि न्याय संगत नहीं लगता। मगर एक मेनस्ट्रीम सिनेमा से आप बहुत रियलिस्टिक यूज़ एक्सपेक्ट नहीं कर सकते हैं।
अगर आपकी कहानी का हीरो हार गया तो फिल्म का सारा फन जाता रहता है। तीसरे पाठक पहुँचते-पहुँचते फ्रेंचाइज़री की स्टोरी पेपर-थिन हो चुकी है, कुछ नया नहीं बचा है ऑफर करने को। उसकी भरपाई मेकर्स ने एक्टर्स की कास्टिंग से करने की कोशिश की, मगर वो इसमें सफल नहीं हो पाए। देवी पहलावत इस बार नहीं आईं हैं, उन्होंने क्राइम ब्रांच के एफडी राजवीर तिंकोमर का रोल किया है। वो अपने कैरेक्टर में एक स्वैगर और एरोगेंस लेकर आते हैं, मगर वो फिल्म का किरदार कम सूत्रधार ज़्यादा बनते रहे जाते हैं। ऐसा लगता है कि उन्हें ये कहानी पहले बता दी गई थी, अब वो बाकी एक्टर्स को कहानी सुना रहे हैं। क्योंकि तोमर के पासर को मालूम सब है, मगर उसके विवेक से तत्काल घटना हो जाने के बाद जल्दी. टिपिकल पुलिस बिहेवियर. फिल्म में एक सीन है जब तोमर पहली बार विद्युत हलगांवकर से मिलता है।

कुछ वक्त विजय एक ऐसी सिचुएशन में है जहाँ वो कुछ कर नहीं सकता, मजबूर है क्योंकि आग उसकी फैमिली तक ऑलमोस्ट पहुँच चुकी है। दिल पर हाथ रख के भड़काने वाला जो सीन है, वो फिल्म का सबसे फीलिंग सीन है। दृश्यम 3 की अच्छी बात ये है कि वो दर्शकों के दिमाग से खेलती है, टेंशन बना रहता है, सस्पेंस आपको आखिर तक बाँधे रखता है कि क्या पता अब क्या हो जाए, कहीं खेल पलट न जाए। ये रूठी और फॉर्मूला पर नहीं चलती, अपने लिए एक अलग रास्ता बनाती है और उसी पर चलती है। प्रेम-विजन, चिलरम, कॉमेडी या डांस नंबर डाल के नैरेटिव में खलल पैदा नहीं करती,
इसलिए इसका इंपैक्ट कभी डायल्यूट नहीं होता। फिल्म चीजों को इस तरह से देखती है कि कैसे 5-6 आदमी ने हॉवर्ड ग्रेजुएट से लेकर पुलिसिया सिस्टम और तमाम पढ़े-लिखे लोगों को मात दी थी। वैसे तो ये डायलॉग-हैवी फिल्म है, जो कैरेक्टर आ रहा है वो अपने लिए फुलों वाले एक अलग माहौल बना रहा है, मगर कुछ संवाद का 20-30 हिस्सा भी विजय या उसकी फैमिली केस से नहीं आता। अंजू पांज फिल्म में मात्र 1 या 2 बार दिखती हैं। श्रिया सरण जो कि नम्रनी के रोल में हैं, विद्युत हलगांवकर की पत्नी के रोल में हैं, उनका किरदार सिर्फ वहीं बोलता है जहाँ उसका बोलना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है।
क्योंकि उसके बोले बिना फिल्म की कहानी आगे नहीं बढ़ती। ये मुझे पॉज़िटिव फील नहीं, जो कि क्रिटिकल गरीनिंग से अलग है। चूँकि ये बेहद जटिल किस्म का सिनेमा है, है ना, उसके पास दर्शकों को हल्का महसूस करवाने के लिए कोई ऑप्शन या स्पेस नहीं है। इसलिए वो कॉमिक रिलीफ वाला जो मैटर है, वो सब इंस्पेक्टर लक्ष्मीकांत गायतोंडे को सौंप दिया जाता है। कमलेश सावंत ने उस ज़िम्मेदारी को बड़े चाव और मज़े लेते हुए निभाया है। जिसमें फिल्म का इंटरवल वाला हिस्सा भी शामिल है, या तो फिल्म देखने के बाद मालूम पड़ेगा। कताश राज ने उस वकील का रोल किया है जो विजय के खिलाफ लड़ रहा है। मगर उनके पास इस भूमिका का थोड़ी बन जाती है, मगर उसका प्रभाव रहता है सुपर कुल जमा बात ये है कि दृश्यम 3 खसियत सीक्वल वाले कर्स से बच जाती है। वो अपने कहानी और नायक के प्रति लॉयल रहती है, वो ऑफर वही करती है जिसका वादा करती है, इसलिए इस फिल्म को पूरी फैमिली के साथ देख और एन्जॉय किया जा सकता है।

Neha Simran
नेहा सिमरन सीजेपी मीडिया में मनोरंजन संपादक हैं। वे बॉलीवुड, ओटीटी, टेलीविजन, वेब सीरीज़, सेलिब्रिटी समाचार और सांस्कृतिक घटनाओं की तथ्यपरक एवं विश्वसनीय रिपोर्टिंग करती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तेज़, सटीक और संतुलित मनोरंजन समाचार पहुँचाना है।


