Father Funeral Viral News: बेटियों ने ₹5100 भेजे, Video Call पर देखा पिता का अंतिम संस्कार
Father Funeral Viral News वीडियो हो रहा है एक बुजुर्ग पिता के अंतिम संस्कार से जुड़ी भावुक घटना चर्चा में है। बेटियों ने अंतिम संस्कार में शामिल होने के बजाय ₹5100 भेजे और वीडियो कॉल के जरिए अंतिम विदाई देखी। जानिए पूरा मामला।

Father Funeral Viral News: हरियाणा के सोनीपत से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने लोगों को भावुक कर दिया। एक बुजुर्ग व्यक्ति का निधन वृद्धाश्रम में हो गया, लेकिन उनकी बेटियां अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए वहां नहीं पहुंचीं। वृद्धाश्रम के कर्मचारियों और स्थानीय लोगों ने मिलकर उनका अंतिम संस्कार कराया, जबकि बेटियों ने पूरी प्रक्रिया वीडियो कॉल के माध्यम से देखी।

इस घटना के बाद समाज में बुजुर्गों की बढ़ती उपेक्षा और बदलते पारिवारिक मूल्यों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि दिवंगत व्यक्ति ने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा अपनी बेटियों की शिक्षा और परवरिश में समर्पित किया था, लेकिन जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें वृद्धाश्रम में रहना पड़ा और अंतिम विदाई के समय भी उनकी बेटियां उनके साथ मौजूद नहीं थीं।
अंतिम संस्कार के लिए भेजे 500 रूपये
वृद्धाश्रम प्रशासन के मुताबिक, कपड़ा कारोबारी शिवचरण रतन गुप्ता काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे। जीवन के अंतिम दिनों में उनकी सबसे बड़ी इच्छा अपनी बेटियों से एक बार मिलने की थी, लेकिन यह इच्छा अधूरी ही रह गई। उनके निधन की सूचना परिवार को दे दी गई थी, फिर भी उनकी तीनों बेटियां न तो वृद्धाश्रम पहुंचीं और न ही अंतिम संस्कार में शामिल हुईं। प्रशासन के अनुसार, बेटियों ने अंतिम संस्कार के लिए 5,100 रुपये भेजे और अनुरोध किया कि अंतिम संस्कार का वीडियो उनके मोबाइल पर साझा कर दिया जाए।
घटना से जुड़े सामने आए वीडियो में शिवचरण रतन गुप्ता की तस्वीर दिखाई देती है, जिसके बाद स्थानीय लोगों और वृद्धाश्रम से जुड़े सदस्यों ने मिलकर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया। एक अन्य वीडियो में उनकी बेटियां वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम संस्कार की प्रक्रिया देखती हुई नजर आती हैं। श्मशान घाट पर परिवार के किसी सदस्य की अनुपस्थिति में स्थानीय समुदाय के लोगों ने सभी आवश्यक धार्मिक रस्में पूरी कीं।
वृद्धाश्रम के प्रशासक आनंद कुमार ने बताया कि बीमारी के कारण शिवचरण रतन गुप्ता अपने अंतिम समय में वृद्धाश्रम में ही रह रहे थे। उन्होंने कहा कि गुप्ता अक्सर अपनी बेटियों से मिलने की इच्छा व्यक्त करते थे और उन्हें उम्मीद थी कि वे उनसे मिलने जरूर आएंगी।
आनंद कुमार के अनुसार, शिवचरण रतन गुप्ता कपड़ा व्यापार से जुड़े थे और उन्होंने अपनी बेटियों की शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया था। उन्होंने उनकी पढ़ाई के लिए हर संभव प्रयास किया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी दो बेटियां आगे चलकर शिक्षिका बनीं। वृद्धाश्रम में उनके साथ रहने वाले लोगों का कहना है कि गुप्ता अपनी बेटियों की उपलब्धियों पर हमेशा गर्व महसूस करते थे और उन्हें संतोष था कि उन्होंने एक पिता के रूप में अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा से निभाईं। हालांकि, उनके अंतिम विदाई के समय परिवार का कोई भी सदस्य मौजूद नहीं था।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पैसों की व्यवस्था होने के बाद वृद्धाश्रम और स्थानीय लोगों ने मिलकर बुजुर्ग का सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार कराया। इस घटना ने सोशल मीडिया और आसपास के क्षेत्र में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। कई लोगों ने बुजुर्ग के जीवन के अंतिम समय की परिस्थितियों पर गहरा दुख व्यक्त किया, जबकि कुछ लोगों ने इसे बढ़ते अकेलेपन का सामना कर रहे बुजुर्ग माता-पिता की स्थिति का प्रतीक बताया। वहीं, कई लोगों का मानना है कि यह घटना मुश्किल समय में परिवार के साथ खड़े रहने के महत्व की याद दिलाती है।
अंतिम संस्कार में परिजनों की बजाय स्थानीय लोगों की मौजूदगी और बेटियों का दूर से इस पूरे घटनाक्रम को देखना समाज में बदलते पारिवारिक रिश्तों को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। लोगों के बीच इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि क्या आज की व्यस्त जीवनशैली और जिम्मेदारियां पारिवारिक संबंधों पर असर डाल रही हैं। फिलहाल इस मामले में बेटियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सुरेन्द्र गहलोत
सुरेन्द्र गहलोत सीजेपी मीडिया में वरिष्ठ समाचार लेखक हैं। वे राष्ट्रीय घटनाओं, जनहित के मुद्दों, सरकारी नीतियों, सामाजिक विषयों और समसामयिक मामलों पर तथ्यपरक एवं निष्पक्ष समाचार लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक विश्वसनीय, स्पष्ट और प्रमाणित जानकारी सरल भाषा में पहुँचाना है। वे गहन शोध और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर समाचार तैयार करने में विश्वास रखते हैं।


