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Mirzapur The Movie Review in Hindi: कहानी, कैसी है फिल्म?

Mirzapur The Movie Review in Hindi में पढ़ें और जानें फिल्म की कहानी, स्टार कास्ट, परफॉर्मेंस, एक्शन, डायरेक्शन और आखिरकार यह फिल्म देखने लायक है या नहीं।

Neha Simran
Neha Simranमनोरंजन संपादक
September 5, 20266 min readBeat: मनोरंजन
Mirzapur The Movie Review in Hindi

Mirzapur The Movie Review in Hindi में पूरी फिल्म के बारे में जानिए मिर्जापुर मूवी को इतना इंतजार करने के बाद आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। फैंस को ये फिल्म इतनी पसंद आई है। इस फिल्म में क्राइम, पावर और बदले की रफटफ दुनिया के बड़े पर्दे पर लेकर आई है, जहाँ पर पंकज त्रिपाठी, अली फजल, रश्मिता त्रिपाठी, दिव्येंदु और रसिका दूबे जैसे कलाकार ने अपना किरदार निभाया है। और नए कलाकारों की बात करें तो मिर्जापुर द मूवी में रवि किसन और सोनल चौहान, मोहित मलिक और जितेंद्र कुमार भी दिखाई देने वाले हैं।

Mirzapur The Movie Review

इस मूवी को बड़े पर्दे पर आने का भी फैंस को इंतजार था। फैंस अपने पसंदीदा किरदारों को और ज्यादा एक्शन, ड्रामा और हंगामे के साथ वापस देखने का उत्साह था। 2018 से मिर्जापुर का तीन सीजन आ गए हैं। उन सीजन के रिलेटेड Mirzapur The Movie को रिलीज किया गया है। ट्रेलर वीडियो पर शुरुआत से प्रत्येकीया की धूम मचा दी है। फैंस खासतौर से गुड्डू पंडित और मिर्जापुर के बादशाह पंकज त्रिपाठी और मुन्ना भैया के बहुत बड़े फैंस होने से नाते इस फिल्म का क्रेडिट इन तीनों को जाता है। इसी वजह से ये फिल्म इतनी पॉपुलर और इतने बड़े पर्दे पर आने पर इतनी फेमस हो पाई।

Mirzapur Release Date

Mirzapur The Movie Review in Hindi मै सिनेमाघरों 4 सितंबर 2026 को रिलीज हो चुकी है। मिर्जापुर द मूवी के डायरेक्टर Gurmmet Singh है इस मूवी को हिंदी और तेलुगु में शूट किया गया है और इसके मुख्य कलाकार होने वाले पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु और अली फज़ल।

Mirzapur The Full Movie Review in Hindi

Mirzapur The Movie

इस फिल्म को देखते जाने वालों में ज़्यादातर लोग वही होंगे जिन्होंने सीरीज़ देख रखी होगी. ज़ाहिर है, किरदारों और उनकी दुनिया से लगभग सभी परिचित होंगे. दुर्लभ नए लोगों के लिए शॉर्ट में समझा देते हैं. Mirzapur पर कालीन भैया और अखंडानंद त्रिपाठी की सत्ता है. पूर्वांचल के बाहुबली कालीन भैया अपने बेटे मुन्ना त्रिपाठी से खफा रहते हैं और अपने लेफ्टिनेंट राइट-हैंड्स से खुश, यानी गुड्डू पंडित और बबलू पंडित. सीरीज़ के पहले सीज़न में असली कॉन्फ्लिक्ट मुन्ना और गुड्डू के बीच ही था |

लेकिन बैकग्राउंड में कालीन भैया के सामने असली थ्रेट है बब्बन यादव ( रवि किशन ) नाम का एक बाहरी आदमी, राजस्थान के जत्समेर से आया है और कालीन भैया को गद्दी से हटाना चाहता है| इस खतरे से निपटने के लिए कालीन भैया और उनकी गैंग क्या करती है, इस बीच मुन्ना-गुड्डू का रिलेशनशिप क्या मोड़ लेता है और सीरीज़ से अलग वजूद में आए नए किरदार क्या गुल खिलाते हैं, यही है मिर्ज़ापुर द मूवी का सेंट्रल प्लॉट. मिर्ज़ापुर द मूवी देखते वक्त आपको एक हज़ार बार लगेगा, यार ये तो देखा हुआ है, सुना हुआ है. कई सीन और डायलॉग्स सीरीज़ से उठाकर सीधे चिपका दिए गए हैं. पर साफ़, लगभग सारा का सारा ही देखा हुआ लगता है।

सेकंड हाफ़ में चीज़ें कुछ सुधरती हैं, लेकिन कमजोर और प्रेडिक्टेबल क्लाइमेक्स मज़ा खराब कर देता है. हालांकि कुछ सीन काफ़ी इंटेंसली भी बने हैं, कुछ एक नए डायलॉग्स भी धमाकेदार हैं. यानी जहाँ भी टीम ने कुछ नया लिखा है, वहाँ फिल्म अटेंशन होल्ड करने लगती है. लेकिन जल्दी से ही पुराने ट्रैक पर लौटती है, चिपकी पड़ जाती है. मुन्ना त्रिपाठी सीरीज़ में मर गए थे, लेकिन फिल्म में लौटे हैं. उनके मिज़ाज का अखड़पन तो बरकरार है लेकिन उनकी कशमकश, उनका फ्रस्ट्रेशन गायब है. इंटरवल के बाद कास्ट कैरेक्टर शिफ्ट दिखाने के लिए उनका किरदार भी कमजोर ढंग से लिखा गया है. ये काफ़ी खलता है. अगर एक लाइन में बताया जाए कि फिल्म का सबसे उम्दा एलिमेंट क्या है।

तो जवाब होगा रवि किशन. आजकल वो पारस पत्थर बने हुए हैं. जिस केस में भी हाथ डाल देंगे, सोना हुए जा रही है. मिर्ज़ापुर में भी सबसे ज़्यादा अटेंशन वही क्रैब करते हैं और सबसे ज़्यादा इम्पैक्ट भी वही करते हैं. बब्बन उर्फ़ बबुआ के रोल को उन्होंने बेहद ग्रेस से निभाया है. बाहुबली बनने का समनाई एक गैंग्टर जो प्रेम में भी है, रवि किशन के डायलॉग डिलीवरी पूरी फिल्म में स्पॉट-ऑन है. और एक पल के लिए भी वो अपना किरदार नहीं छोड़ते, पूरी फिल्म ही उनके इर्द-गिर्द घूमती है और इसी वजह से बर्दाश्त करने लायक भी लगती है. रवि किशन के अलावा बाकी जितने भी कलाकार हैं।

Mirzapur The Movie Review

उन्होंने वही सब किया है जो वो सीरीज़ में करते आए हैं. पंकज त्रिपाठी मीटर की तरह शानदार हैं, गुड्डू पंडित के रोल में अली फज़ल एकदम मासी दस्ताने की तरह फिट हो चुके हैं. हाँ बब्लू के किरदार में विक्रांत मैसी में खटकती है, उनकी जगह आए जितेंद्र कुमार के काम में कोई खोट नहीं, लेकिन जो स्मरण विक्रांत की बॉडी लैंग्वेज में था, वो जितेंद्र के पास नहीं दिखाई देता. नए किरदारों में याद रखने लायक काम है मोहित मलिक का. टीवी से फिल्मों की तरफ आ रहे मोहित मलिक ने गर्जो लोहार का दमदार किरदार अदा किया है. उनका काम प्रभावित करता है।

जितेन्द्र के किरदार का आज अभी क्वेश्चनेबल है लेकिन उनके काम में कोई कमी नहीं है. काम उम्दा किया है. जेपी यादव के साथ कन्फ्रंटेशन वाला एक सीन भी था. उस सीन में वो पूरी तरह अपने पुराने फॉर्मा में नजर आते हैं और तालियाँ बटोर ले जाते हैं. बाकी सभी सॉक कलाकारों ने अच्छा काम किया है रसिका दुग्गल, अभिषेक बनर्जी, श्वेता त्रिपाठी, श्रीया पिलगांवकर वगैरह. सोनल चौहान को लंबे समय के बाद एक अच्छे रोल में देखना अच्छा लगता है।

म्यूज़िक और बाकी पक्षों की बात करें तो गाने कुछ खास हैं नहीं, क्लाइमेक्स में एक जगह धनंजय स्टाइल में कासों की माला पर बजता है, वो भला लगता है. बस. इसके अलावा कुछ नामी वनिटे. म्यूज़िक एक गाना बैकग्राउंड में पंजाबी गाने बजते हैं, वो भी हल्का-हल्का लगते हैं. भैया आपकी फिल्म शेड गूपी की है. थोड़े वक्त के लिए राजस्थान गई हैं. पंजाबी गाने क्या कर रहे हैं फिल्म में? फिल्म की सिनेमैटोग्राफी शानदार है. राजस्थान के रेगिस्तान खूबसूरती से कैप्चर हुए हैं. कुल मिलाकर मिर्ज़ापुर द मूवी आपको तभी पसंद आएगी जब आप सीरीज़ के जाय-हॉक फैन हों और इन किरदारों को वही चीज़ बार-बार करते देखना पसंद करते हों. हालांकि फिल्म पूरी तरह फेलियर नहीं है. इसके अपने कुछ फेमस मूमेंट्स सही हैं।

#Mirzapur The Movie Review in Hindi
Neha Simran
मनोरंजन संपादक • मनोरंजन

Neha Simran

नेहा सिमरन सीजेपी मीडिया में मनोरंजन संपादक हैं। वे बॉलीवुड, ओटीटी, टेलीविजन, वेब सीरीज़, सेलिब्रिटी समाचार और सांस्कृतिक घटनाओं की तथ्यपरक एवं विश्वसनीय रिपोर्टिंग करती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तेज़, सटीक और संतुलित मनोरंजन समाचार पहुँचाना है।