Delhi Sansad Chalo March: संसद चलो’ मार्च में क्या हुआ, जानिए पूरी कहानी
Delhi Sansad Chalo March: दिल्ली में ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। कई जगह झड़प, नारेबाजी और तनाव की स्थिति देखने को मिली। जानिए पूरे प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और विवाद की पूरी कहानी।


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Table of Contents
- ➔जंतर-मंतर से संसद तक मार्च की कोशिश
- ➔चंद्रशेखर आज़ाद सांसद
- ➔जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई
- ➔अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने जारी किया संदेश
- ➔सरकार और प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत
- ➔छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बढ़ा दबाव
- ➔विपक्षी दलों ने जताया समर्थन
- ➔अभिजीत दीपके ने बताई आगे की रणनीति
- ➔Delhi Sansad Chalo March
नई दिल्ली: सोमवार को राजधानी दिल्ली में आयोजित "संसद चलो" मार्च के दौरान बड़ा तनाव देखने को मिला। शिक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों, परीक्षा पेपर लीक मामलों और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था के चलते पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके बाद कई स्थानों पर झड़पें और तनाव की स्थिति बन गई।

जंतर-मंतर से संसद तक मार्च की कोशिश
प्रदर्शनकारियों का दावा था कि वे शिक्षा से जुड़े मुद्दों और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद तक शांतिपूर्ण मार्च निकालना चाहते थे। लेकिन पुलिस द्वारा लगाए गए बैरिकेड्स और सुरक्षा घेरे के कारण मार्च आगे नहीं बढ़ सका।
शांतिपूर्ण कर रहे स्टूडेंट प्रदर्शन में दिल्ली पुलिस ने आज इन बच्चों के ऊपर लाठी चार्ज, टियर गैस, स्मोक, द्वारा इन बच्चों को पूरी तरह पीटा गया ऐसा व्यवहार भारत के कानून व्यवस्था में ऐसा मंजर आज पहली बार देखने को मिला जैसे कोई आतंकवादियों के साथ दुष्ट व्यवहार करते हैं वैसा आज स्टूडेंट के ऊपर अत्यासार किया गया।

संसद मार्च के टाइम पुलिस वालो ने 12 साल की बच्ची को बुरी तरह मारा गया उनके कपड़े फाड़े गए और उनको लाते, घुसे, लाठिया मरी गयी। यह दिल्ली पुलिस वह सरकार की तानासाही और पुलिस वालों के पास बेच भी नहीं थे जिससे आईडेंटिफाई किया जाए की कौन है पुलिस की मार से बच्चे सड़क पर बेहोश हो गए थे फिर भी मारा जा रहा था पुलिस के बेस में गुंडो की तरह बर्ताव किया गया
चंद्रशेखर आज़ाद सांसद
जुल्म जब भी हद से आगे बढ़ने लगता है, वहीं से बदलाव का सूरज निकलने लगता है। आज जंतर-मंतर पर बच्चों और बच्चियों के साथ जिस प्रकार का बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया गया, उसने मन को गहराई तक झकझोर दिया। मैंने जलियांवाला बाग का वह दौर नहीं देखा, लेकिन आज जो दृश्य सामने आए, उन्होंने इतिहास के उस काले अध्याय की याद अवश्य दिला दी।

लोकतंत्र में अपनी बात शांतिपूर्ण ढंग से रखना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। यदि उस अधिकार का उत्तर बल प्रयोग से दिया जाए, तो यह केवल कुछ लोगों पर नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों पर भी आघात है।
इसी पीड़ा और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के संकल्प के साथ, आज से मैं संसद भवन परिसर में परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे धरने पर बैठ रहा हूँ। जब तक न्याय सुनिश्चित नहीं होता और इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई नहीं होती, मेरा यह शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक संघर्ष जारी रहेगा।
जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई
स्थिति बिगड़ने के बाद जंतर-मंतर और संसद मार्ग के आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी गई। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बंद कर दिया। प्रदर्शन स्थल पर लगाए गए कुछ अस्थायी ढांचे और टेंट भी हटाए गए।

प्रदर्शनकारियों ने बताया की जो बेरी गेट लगे हुए हैं उनमें करंट चल रहा है जैसे कोई दिल्ली पुलिस बच्चों की जान लेना चाहती है आप इन इमेज में देख सकते हो की किस तरह बच्चों के ऊपर लाठी चार्ज की गई
अस्पताल में भर्ती सोनम वांगचुक ने जारी किया संदेश
अनशन पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक फिलहाल अस्पताल में भर्ती हैं। उन्होंने अस्पताल से जारी अपने संदेश में कहा कि छात्रों के मुद्दों को गंभीरता से उठाए जाने तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
वांगचुक ने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार छात्रों की चिंताओं पर सकारात्मक कदम उठाती है और जिम्मेदारी तय करने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो वे अपने अनशन को समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
सरकार और प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन के प्रतिनिधियों ने सोमवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने सरकार के समक्ष कई मांगें रखीं, जिनमें आंदोलनकारियों के खिलाफ कार्रवाई रोकने, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग शामिल थी।
बैठक के बाद प्रतिनिधियों ने कहा कि सरकार ने उनकी बात सुनी है, लेकिन फिलहाल किसी मांग पर स्पष्ट आश्वासन नहीं दिया गया है। दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि प्रस्तुत मांगों पर उचित स्तर पर विचार किया जाएगा।
छात्रों से जुड़े मुद्दों पर बढ़ा दबाव
आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि हाल के महीनों में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं को लेकर कई विवाद सामने आए हैं। उनका आरोप है कि इन घटनाओं ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों को प्रभावित किया है। इसी कारण वे शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।
विपक्षी दलों ने जताया समर्थन
कई विपक्षी नेताओं ने प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन व्यक्त किया और आंदोलन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। विपक्ष का कहना है कि छात्रों की समस्याओं पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए और सरकार को उनकी मांगों पर जवाब देना चाहिए।
अभिजीत दीपके ने बताई आगे की रणनीति
आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल अभिजीत दीपके ने मीडिया से बातचीत में कहा कि संसद मार्च को आगे बढ़ाने के बजाय फिलहाल छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उनका कहना था कि हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे थे और किसी भी बड़े हादसे से बचने के लिए यह फैसला लिया गया।
दीपके ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया गया। उन्होंने दावा किया कि कई छात्रों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ भी सख्ती बरती गई।
Delhi Sansad Chalo March
प्रदर्शनकारी नेताओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक जंतर-मंतर पर उनका धरना और विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। वहीं, सरकार और आंदोलनकारियों के बीच आगे भी बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।
- धर्मेंद्र प्रधान एजुकेशन मिनिस्टर रिजाइन
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Neha Simran
नेहा सिमरन सीजेपी मीडिया में मनोरंजन संपादक हैं। वे बॉलीवुड, ओटीटी, टेलीविजन, वेब सीरीज़, सेलिब्रिटी समाचार और सांस्कृतिक घटनाओं की तथ्यपरक एवं विश्वसनीय रिपोर्टिंग करती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक तेज़, सटीक और संतुलित मनोरंजन समाचार पहुँचाना है।


