Jantar Mantar Protest News Today: CJP और सरकार के बीच क्या हुई बातचीत? जानिए बड़ा अपडेट
Jantar Mantar Protest News Today: जंतर-मंतर प्रदर्शन को लेकर CJP और केंद्र सरकार के बीच हुई अहम बातचीत का बड़ा अपडेट सामने आया है। जानिए भूख हड़ताल खत्म होने की वजह और क्या बनी सहमति।


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Jantar Mantar Protest News Today, 24 जुलाई 2026: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के दो सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को केंद्र सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों से मुलाकात कर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के

इस्तीफे की अपनी मांग को दोहराया। पार्टी की ओर से स्पष्ट किया गया कि इस मुद्दे पर उनका रुख पहले जैसा ही है और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। प्रतिनिधिमंडल ने 20 जुलाई को छात्रों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान हुई कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक माफी की मांग भी उठाई।
पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास के अनुसार, केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिए जाने की मांग भी रखी गई। उन्होंने बताया कि इस विषय पर सरकार और प्रतिनिधिमंडल के बीच आगे की चर्चा के लिए अगली बैठक 25 जुलाई, 2026 को निर्धारित की गई है।
इस बीच, केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाने का दावा किया है। सरकार द्वारा पेपर लीक रोकने से संबंधित कानून को और अधिक सख्त बनाया गया है। साथ ही, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों की सेवाएं समाप्त करने जैसी प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई है।

दूसरी ओर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया पर उठ रहे सवालों के बीच एक विस्तृत वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ उनका किसी प्रकार का समझौता नहीं हुआ है। उनके अनुसार, उन्होंने अपना अनशन प्रदर्शनकारियों और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समाप्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि जंतर-मंतर पर मौजूद लोगों के खिलाफ संभावित कार्रवाई की आशंका को देखते हुए यह फैसला लिया गया।
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने छात्रों के आंदोलन को शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन ने देशभर में शिक्षा प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर व्यापक चर्चा शुरू की है और यह नीति-निर्माताओं के लिए गंभीरता से विचार करने का अवसर है। उनका मानना है कि इस विरोध-प्रदर्शन ने शिक्षा सुधारों की आवश्यकता को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से सामने रखा है।
यह पूरा घटनाक्रम NEET परीक्षा से जुड़े विवाद, शिक्षा सुधारों की मांग और छात्रों की आवाज को लेकर जारी राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलन से जुड़े पक्षों के बीच होने वाली बैठकों पर सभी की नजरें बनी रहेंगी।
आशुतोष रांका मंत्री से मुलाकात
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने सरकार के साथ हुई हालिया बैठक को लेकर कहा कि मुआवज़े और कानूनी मामलों पर सकारात्मक संकेत मिले हैं और कुछ मुद्दों पर सैद्धांतिक सहमति भी बनी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन सहमतियों को जल्द ही लिखित रूप में भी साझा किया जाएगा।
हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन की प्रमुख मांग, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के मुद्दे पर अभी तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। रांका के अनुसार, मीडिया रिपोर्टों में यह जानकारी सामने आई है कि मंत्री के इस्तीफ़े की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि यदि सरकार इस मांग पर आगे बढ़ने के लिए तैयार नहीं है, तो केवल औपचारिक बैठकों से कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार अपनी वर्तमान स्थिति पर कायम रहती है, तो संगठन अपनी आगे की रणनीति पर विचार करेगा और आंदोलन को लेकर अधिक सख्त रुख अपनाने का निर्णय लिया जा सकता है। रांका ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट और पारदर्शी रुख सामने रखने की अपील की है।
यह बयान समाचार एजेंसी ANI द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है।
Sourav Das और Delhi Police
शुक्रवार (24 जुलाई) को दिल्ली ट्रैफ़िक पुलिस की ओर से जारी नई ट्रैफ़िक एडवाइज़री की आलोचना करते हुए CJP के सौरव दास ने कहा, "सरकार जंतर-मंतर की घेराबंदी करना चाहती है! वह वहाँ तक खाना और पानी पहुँचाने, साफ़-सफ़ाई की सुविधाओं, मेडिकल इलाज, बिजली लाइनों और लोगों की आवाजाही को रोकना और सीमित करना चाहती है!
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पेपर लीक मामलों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का गठन करना उन छात्रों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम होगा, जो अपनी मेहनत और योग्यता के बल पर परीक्षाओं में सफलता हासिल करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि छात्रों के अधिकारों की रक्षा करना और देश के युवाओं के लिए एक पारदर्शी एवं निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। उनका मानना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई से छात्रों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा और मजबूत होगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी कि पेपर लीक से जुड़े मामलों में दोषियों को जल्द और सख्त सजा दिलाने के उद्देश्य से फास्ट-ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखना और युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ शीघ्र कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
सरकार का कहना है कि इस पहल से न केवल परीक्षा में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी, बल्कि देशभर के लाखों छात्रों को न्याय मिलने की प्रक्रिया भी तेज होगी। इससे ईमानदारी से तैयारी करने वाले विद्यार्थियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूती मिलेगी।
सोनम वांगचुक सरकार के साथ कोई समझौता नहीं किया
केंद्रीय मंत्रियों की मौजूदगी में अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने के बाद सोशल मीडिया पर उठे सवालों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 24 जुलाई 2026 को एक विस्तृत वीडियो संदेश जारी किया। अपने संदेश में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के साथ उनकी किसी भी प्रकार की राजनीतिक या व्यक्तिगत सहमति नहीं हुई है।
सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्होंने अपनी भूख हड़ताल किसी समझौते के कारण नहीं, बल्कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों और समर्थकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए समाप्त करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि उन्हें आशंका थी कि यदि आंदोलन आगे बढ़ता है, तो प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका फैसला आंदोलन के उद्देश्य से पीछे हटने का नहीं, बल्कि संभावित तनावपूर्ण स्थिति से छात्रों और प्रदर्शनकारियों को बचाने के लिए लिया गया एक जिम्मेदार कदम था। वीडियो संदेश के माध्यम से उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही उन अटकलों को खारिज करने की कोशिश की, जिनमें सरकार के साथ किसी समझौते की बात कही जा रही थी।
इस घटनाक्रम ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर सार्वजनिक चर्चा को तेज कर दिया है।

Varun Pandey
वरुण पांडेय सीजेपी मीडिया में प्रौद्योगिकी संपादक हैं। वे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, स्टार्टअप, डिजिटल सेवाओं और नई तकनीकों पर लेखन करते हैं तथा जटिल तकनीकी विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करते हैं।


