Breaking
National

Indian Railways News: रेलवे AC ट्रेनों से ₹104 करोड़ का बेडरोल गायब RTI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

Indian Railways News: RTI रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, भारतीय रेलवे की AC ट्रेनों से करीब ₹104 करोड़ मूल्य का बेडरोल गायब हो गया। जानें यह मामला क्या है, कितने बेडशीट, कंबल और तकिए लापता बताए गए हैं, रेलवे ने क्या सफाई दी और पूरी रिपोर्ट।

आकाश सैनी
July 14, 20266 min read
Indian Railways News 100 carod ki chori

Indian Railways

Indian Railways News में ट्रेन यात्रा के दौरान सामान चोरी होने या हाल ही में चर्चा में रही बेडरोल/चादर-कंबल की चोरियों की रपोट सामने आई, 1 करोड़ 27 लाख यही वो संख्या है जिसने भारतीय रेलवे और करोड़ों यात्रियों के सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा कर दिया, सवाल ये कि क्या हम सच में सार्वजनिक संपत्ति को अपनी संपत्ति मानते हैं या फिर मौका मिलते ही उसे अपना समझकर घर ले जाने में भी हिचकते नहीं है.

Indian Railways News
Indian Railways

Indin Express ने RTI लगाई

इंडियन एक्सप्रेस ने एक RTI लगाई जिसके जरिए ये मालूम पड़ा की जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच देश के 69 में से 54 रेलवे डिवीजन के डाटा में खुलासा हुआ कि एसी कोड से 1 करोड़ 27 लाख बेड रोल आइटम गायब हो गए. सिर्फ 2022 से 2025 के बीच ही इन चोरियों में 56 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यानी समस्या. छोटी नहीं है बल्कि लगातार बड़ी होती जा रही है. अब सवाल ये उठता है कि आखिर लोग सबसे ज्यादा चुरा क्या रहे हैं?

चोरी किस चीज की हो रही है?

अगर आंकड़ों को हम देखें तो सबसे ऊपर है फेस टॉवल. करीब 46 लाख 54 हजार तौले गायब हो चुके हैं. इसके बाद 41 लाख 13 हजार, चादर 23 लाख 68 हजार, तकियों के कवर 12 लाख 95 हजार कंबल 2 लाख 13 हजार तक के भी यात्रियों के साथ ट्रेन से उतर गए.

इन चोरियों की वजह से रेलवे के बेडरोल ठेकेदारों को 104 करोड़ 51 हजार रुपए का नुकसान उठाना पड़ा. दिलचस् बात ये है कि चोरी पूरे देश में बराबर नहीं हुई. कुल चोरी का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ दस रेलवे डिवीजन में दर्ज किया गया. इनमें बीकानेर है, जोधपुर है, जयपुर, रांची, दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सोनपुर, दानापुर और बिलासपुर शामिल है. सबसे ज्यादा चोरी बीकानेर डिवजन में हुई जहाँ 25 लाख 76 हजार आइटम गायब हो गए वहीं जोधपुर में कंबल सबसे ज्यादा गायब हुए जबकि दिल्ली, मुंबई, रांची और अहमदाबाद में तौलिए सबसे ज्यादा चोरी कर लिए गए।.

रेलवे AC ट्रेनों से ₹104 करोड़ का बेडरोल गायब
रेलवे AC ट्रेनों से ₹104 करोड़ का बेडरोल गायब

आज बात सिर्फ चादर कंबल या तकिये की नहीं कर रहे हैं. बात उस सोच की माइंड की हैं जो हमें से कुछ लोगों के भीतर अब भी जिंदा है चोरियां हो रही है. रेलवे के कंबल और तकियों की जरा एक सीन की कल्पना कीजिए. रात भर सफर करने के बाद सुबह Train अपने स्टेशन पर पहुँच जाती है.

लोग अपना सामान समेट रहे होते हैं तभी कुछ यात्री रेलवे की सफेद चादर, छोटा तोौलिया और तकिए का कवर भी चुपचाप अपने बैग में डाल लेते हैं. शायद उन्हें ये लगने लगता है कि उनका टिकट महंगा था. इसीलिए ये सामान भी उनका ही है. या फिर उन्हें भरोसा होता है कि कोई पूछने वाला है ही नहीं. तो क्यों, किस बात की चोरी या किस बात का छिपाने की कोशिश करें. यही सोच इस समस्या को इतना बड़ा बना देती है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती और अलग-अलग शहरों की अपनी अपनी पसंद भी इस रिपोर्ट में दिखाई देती है.

इस पूरी कहानी का सबसे दर्दनाक हिस्सा अभी बाकी है. अक्सर हमें ये लगता है कि ऐसे नुकसान का असर सिर्फ रेलवे या किसी बड़े ठेकेदार पर पड़ता होगा लेकिन हकीकत कुछ और ही है. ट्रेनों में आपकी सीट बेड रोल और सुविधा का ध्यान रखने वाले कोच attendant जो दिन रात मेहनत करते हैं, ट्रेनों के कोच के लिए उन्हें रोज करीब सात सौ रुपए की दिहाड़ी मिलती है. सोचिए कई मामलों में चोरी हुई सामान का हिसाब उनकी तनख्वाह से काट लिया जाता है. यह सबसे दर्दनाक बात है.

एक अटेंडेंट ने बताया की इक्कीस हजार की महीने की कमाई में से दो से तीन हजार रूपए सिर्फ इसीि उसके काट लिए गए क्योंकि कुछ यात्रियों ने चादर या फिर तौलिया वापस नहीं किया क्योंकि हिसाब तो पूरा होता है. अब जरा सोचिए जिसने पूरी रात आपकी सेवा की हो आखिर नुकसान उसकी जेब से क्यों जा रहा है? यही इस रिपोर्ट का सबसे तकलीफदायक पहलू है.

अब देखिए मेरे हिसाब से ये सिर्फ कुछ बेडरोल आइटम की चोरी नहीं है. ये हमारी नागरिक जिम्मेदारी की भी परीक्षा है हम चाहते हैं की भारत की ट्रेनें जापान और यूरोप जैसी हो हम वंदे भारत जैसी एडवांस ट्रेनों की मांग भी लगातार करते हैं, सुविधाओं की मांग करते हैं, लेकिन अगर सार्वजनिक संपत्ति की जिम्मेदारी निभाने में ही हम पीछे रह जाए तो फिर बेहतर सुविधाएं भी लंबे समय तक टिक नहीं पाएंगे. सारा खेल माइंडसेट का है, सारा खेल आपकी सोच का है. हालांकि इस कहानी का एक पॉजिटिव नोट भी है कि दिल्ली डिवीज़ ने सख्त निगरानी और बेहतर व्यवस्था के जरिए इन चोरियों में 79 प्रतिशत तक कमी दर्ज की है।. वहीं तिरुचिला पल्ली और पलक्कड़ Division से एक भी चोरी की रपोट नहीं आई है.

बदलाव ये हुआ है शायद असर भी. इसका मतलब साफ है कि अगर सिस्टम मजबूत हो रहा है या नियमों का पालन शक्ति से हो रहा है तो बदलाव भी संभव है. लोग समझ भी रहे हैं. वैसे रेलवे भी अब इस दिशा में कदम उठा रहा है. कई ट्रेनों में CCTV लगाने या फिर कोच मित्र ऐप के जरिए निगरानी बढ़ाने या फिर स्टेशन पहुंचने से पहले बेड रोल वापस लेने जैसी जो व्यवस्थाएं हैं ये जो पूरा मैनेजमेंट है लागू किया जा रहा है. रेलवे प्रॉपर्टी एक्ट के तहत ये गैर जमानती अपराधी है. अगर आपको मालूम नहीं है तो मैं आपको बता डन मेरी राय में अब सिर्फ अपील करने से काम नहीं चलेगा.

ऐसे यात्रियों को ऐसे पैसेंजर पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए जो इस तरह की चोरी करते हैं. बार-बार ऐसा करने वालों की यात्रा पर रोक लगाने जैसे विकल्पों पर भी विचार होना चाहिए क्योंकि जब तक चोरियाँ रुकेगी नहीं और चोरी की कीमत चोर नहीं चुकाएगा तब तक उसका बोझ किसी गरीब कर्मचारी या फिर सिस्टम पर ही पड़ता रहेगा. आप बताइए क्या रेलवे को ऐसे यात्रियों, ऐसे पैसेंजर्स के खिलाफ और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए?. आपकी राय का हम इंतजार होता है. अगर आपने भी कभी ऐसा कुछ होते देखा है तो जरूर हमारे साथ यह पूरा वाक्य आप शेयर कर सकते हैं.


#IndianRailwaysNews#रेलवे#₹104करोड़#RTIरिपोर्ट
आकाश सैनी
प्रधान संपादक

आकाश सैनी

आकाश सैनी सीजेपी मीडिया के प्रधान संपादक हैं। वे राष्ट्रीय मुद्दों, सार्वजनिक नीतियों और समसामयिक घटनाओं पर निष्पक्ष एवं तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए प्रतिबद्ध हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, विश्वसनीय और प्रभावशाली समाचार पहुँचाना है।