नितिन गडकरी का इथेनॉल ईंधन E85 क्या है
आजकल भारत में E85 इथेनॉल ईंधन की काफी चर्चा हो रही है। सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी कई सालों से इथेनॉल आधारित ईंधन को बढ़ावा दे रहे हैं। उनका मानना है कि इससे पेट्रोल पर निर्भरता कम होगी, किसानों को फायदा मिलेगा और प्रदूषण भी घटेगा।


नितिन गडकरी
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E85 क्या है?
E85 एक प्रकार का ईंधन है जिसमें लगभग 85% इथेनॉल और 15% पेट्रोल मिला होता है। यहां E का मतलब Ethanol और 85 का मतलब उसमें मौजूद इथेनॉल की मात्रा है।

इथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे गन्ने, मक्का, गुड़ और कृषि उत्पादों से बनाया जाता है। यह पेट्रोल की तुलना में अधिक पर्यावरण अनुकूल माना जाता है।
नितिन गडकरी E85 को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं?
भारत अपनी जरूरत का काफी कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। इससे देश पर बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है। नितिन गडकरी का मानना है कि अगर भारत में बने इथेनॉल का ज्यादा इस्तेमाल होगा तो:
- विदेशों से तेल आयात कम होगा।
- किसानों की आय बढ़ेगी।
- प्रदूषण कम होगा।
- ईंधन की कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।
इसी सोच के कारण सरकार लगातार इथेनॉल मिश्रित ईंधन को बढ़ावा दे रही है।
क्या हर गाड़ी में E85 इस्तेमाल किया जा सकता है?
नहीं।

E85 केवल उन गाड़ियों में इस्तेमाल किया जा सकता है जो फ्लेक्स-फ्यूल व्हीकल (Flex Fuel Vehicle - FFV) होती हैं। इन गाड़ियों के इंजन और फ्यूल सिस्टम को इस तरह बनाया जाता है कि वे E20 से लेकर E100 तक के इथेनॉल मिश्रण पर चल सकें।
अगर सामान्य पेट्रोल गाड़ी में E85 डाल दिया जाए तो इंजन और फ्यूल सिस्टम को नुकसान हो सकता है। इसलिए बिना कंपनी की सलाह के इसका उपयोग नहीं करना चाहिए।
E85 के फायदे
1. पेट्रोल से सस्ता
E85 की कीमत सामान्य पेट्रोल से कम रखी गई है। इससे वाहन चलाने का खर्च कम हो सकता है।
2. पर्यावरण के लिए बेहतर
इथेनॉल पौधों और कृषि उत्पादों से बनता है, इसलिए यह पेट्रोल की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है।
3. किसानों को फायदा
इथेनॉल बनाने के लिए गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों की जरूरत होती है। इससे किसानों की फसल की मांग बढ़ती है और उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।
4. विदेशी तेल पर निर्भरता कम
अगर देश में अधिक इथेनॉल बनेगा और उसका उपयोग बढ़ेगा, तो भारत को कम कच्चा तेल आयात करना पड़ेगा। इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
E85 के कुछ नुकसान
E85 के कई फायदे हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं।
- इसकी माइलेज सामान्य पेट्रोल से थोड़ी कम हो सकती है।
- इसे हर गाड़ी में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
- अभी इसकी उपलब्धता सभी पेट्रोल पंपों पर नहीं है।
- फ्लेक्स-फ्यूल गाड़ियों की संख्या अभी कम है।
भारतीय नागरिको का मानना है की इथेनॉल फ्युएल गाड़ियों में डालने से गाड़ियों का एवरेज पहले से कम आ रहा है, और इथेनॉल गाड़ियों में डलवाने के बाद कुछ दिनों के लिए गाड़ी इस्तेमाल नहीं करते है तो गाड़ियों में इथेनॉल जम जाता है और कुछ वीडियो सोशल मिडिया पर वायरल हो रहा है की फ्यूल टंकी पर मखिया और चीटियां बैठी नजर आ रही है
इथेनॉल फ़्यूल को बोतल में डालने से इथेनॉल (गने का जूस) अलग दिखाई दे रहा है और पेट्रोल अलग दिखाई दे रहा है आज 85% इथेनॉल यानि (85% गने का जूस) और 15% पेट्रोल होता है |
भारत में E85 का भविष्य
भारत सरकार E20 के बाद अब E85 और E100 जैसे इथेनॉल ईंधनों को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में ज्यादा से ज्यादा फ्लेक्स-फ्यूल वाहन और इथेनॉल पंप शुरू करना है। कई कंपनियां भी ऐसी गाड़ियों पर काम कर रही हैं।
निष्कर्ष
E85 एक नया और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है, जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है। नितिन गडकरी इसे भारत के भविष्य का ईंधन मानते हैं क्योंकि इससे किसानों को फायदा, प्रदूषण में कमी और विदेशी तेल पर निर्भरता कम हो सकती है। हालांकि, इसका उपयोग केवल फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों में ही किया जा सकता है।
आने वाले समय में E85 भारत के परिवहन क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव ला सकता है और देश को स्वच्छ एवं आत्मनिर्भर ऊर्जा की ओर ले जा सकता है।

Ashutosh Sharma
आशुतोष शर्मा सीजेपी मीडिया के प्रधान संपादक एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं। वे राष्ट्रीय राजनीति, चुनाव, सार्वजनिक नीतियों, शासन and जनहित के विषयों पर गहन विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। उनकी पत्रकारिता तथ्य, निष्पक्षता और विश्वसनीयता पर आधारित है।


